पवित्र धार्मिक ग्रंथ ने बदल दी जिंदगी, ईशान किशन की सफलता का राज....
15 फरवरी 2026 की तारीख और रविवार का दिन....जब कोलंबो की पिच पर भारत पाकिस्तान मैच में ईशान किशन ने जबर्दस्त पारी खेली। पूरा देश इसे ऐतिहासिक पारी के तौर पर याद रखेगा। 27 साल के इस नौजवान ने अपनी तूफानी पारी से भारत को शुरुआती बढ़त दिला दी थी। एक समय ऐसा भी आया था जब ईशान किशान का बुरा दौर चल रहा था और वो विकेटकीपरों की लिस्ट में पांचवें नंबर पर जाकर खड़े हो गए थें।
पूरा देश ईशान किशन की तारीफों के पुल बांध रहा है। हर कोई ईशान किशन के प्रर्दशन की तारीफ कर रहा है लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब हर किसी को यह लगने लगा था कि अब शायद ईशान किशन के लिए टीम इंडिया के दरवाजे बंद हो चुके हैं।
ईशान किशन का जब बुरा दौर चल रहा था, उनके पिता ने एक सलाह दी और ईशान का जीवन बदल गया। ईशान की सोच बदल गई और आंज उसका परिणाम सबके सामने है। ईशान पूरे देश के चहेते क्रिकेटर बन चुके हैं।
27 साल के विकेटकीपर बैट्समैन ईशान किशन ने जब क्रिकेट से दूरी बनाई तब उनके पिता ने उन्हें श्रीमद्भागवत गीता का अध्ययन करने की सलाह दी। आज ईशान किशन जिस नए रुप और तेवर में नजर आ रहे हैं, वो उनके पिता की उसी सलाह का नतीजा है।
15 फरवरी 2026 की तारीख और रविवार का दिन....जब कोलंबो की पिच पर भारत पाकिस्तान मैच में ईशान किशन ने जबर्दस्त पारी खेली। पूरा देश इसे ऐतिहासिक पारी के तौर पर याद रखेगा। 27 साल के इस नौजवान ने अपनी तूफानी पारी से भारत को शुरुआती बढ़त दिला दी थी। एक समय ऐसा भी आया था जब ईशान किशान का बुरा दौर चल रहा था और वो विकेटकीपरों की लिस्ट में पांचवें नंबर पर जाकर खड़े हो गए थें।
ऐसा नहीं था कि ईशान का नाम नहीं चलता था। उनका नाम चलता था लेकिन प्लेइंग इलेवन से वो दूर रह जाते थें। तब लोगों के दिलो दिमाग में यह सवाल चलता था कि क्या अब ईशान किशन की वापसी नहीं हो पाएगी! फिर एक समय आया जब ईशान किशन ने क्रिकेट से ब्रेक ले लिया।
उन्हें जानने वाले बताते हैं कि ईशान मानसिक दबाव से जूझ रहे थें। सोशल मीडिया पर उनका मजाक बन रहा था। वो शांत रहने लगे थें। उनके पिता प्रणव पांडेय बताते हैं कि ईशान मुस्कराना छोड़ चुका था। मैं और मेरी पत्नी हमेशा इस बात के लिए रोते थें कि जो बच्चा 12 साल की आयु में सिर्फ क्रिकेट के लिए पटना छोड़ रांची चला गया था, सोशल मीडिया पर उसके मीम्स को देखकर काफी दुख होता था।
इस कठिन परिस्थिति में ईशान के पिता ने उन्हें श्रीमद्भागवत गीता के अध्ययन की सलाह दी। ईशान की दादी ने यही सलाह एक वक्त में उनके पिताजी को दी थी। जब मन में व्यथा हो, उलझन हो या तनाव हो तो व्यथा को मन के भीतर रखो। गीता को खोलो, जो भी पृष्ठ आएगा, उसमें उन उलझनों का जवाब होगा।
ईशान के पिता ने बेटे को छोटी सी पॉकेट गीता दी। ईशान ने उन्हें पढ़ना शुरु किया। ईशान को गीता से जीवन को नए सिरे से जीने की प्रेरणा मिली। लक्ष्य से पहले प्रक्रिया के महत्व को समझा। कर्म को सबसे उपर रखा। ईशान के जीवन में परिवर्तन आया और यह उनके खेल में परिलक्षित होने लगा।
खिलाड़ियों के लिए खेल में जीत हार सामान्य बात होती है। पाकिस्तान के खिलाफ ईशान के प्रर्दशन ने देश को मैच तो जिताया ही साथ ही साथ ईशान ने पूरे भारत का दिल जीत लिया। गीता का ज्ञान एक टूट चुके मनुष्य में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है, उसकी गवाही ईशान किशन का वर्तमान दे रहा है।
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