कोलकाता लंदन बस सर्विस कभी कोलकाता से लंदन तक चलती थी बस, बिहार से होकर गुजरती थी...बंद होने की वजह....

इस बस सर्विस की शुरुआत 15 अप्रैल 1957 को हुई थी। पहली बार 20 यात्रियों को बैठाकर यह बस लंदन से रवाना हुई जो 05 जून 1957 को कोलकाता पहुंची। वर्ष 1976 में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने लगा। इसकी वजह से यह बस सेवा बंद हो गई और फिर कभी शुरु नहीं हुई।

Feb 2, 2026 - 10:17
Feb 2, 2026 - 10:21
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कोलकाता लंदन बस सर्विस कभी कोलकाता से लंदन तक चलती थी बस, बिहार से होकर गुजरती थी...बंद होने की वजह....

संभव है कि आप इस बात पर यकीन न करें लेकिन यह हकीकत है कि एक समय में कोलकाता से होकर लंदन तक बस चला करती थी। ये बस 70 के दशक में चला करती थी। इस बस सर्विस को सिडनी की अल्बर्ट टूर एंड ट्रैवल्स कंपनी चलाया करती थी। उस दौर में कोलकाता को कलकत्ता कहा जाता था और यह दुनिया की सबसे लंबी बस यात्रा हुआ करती थी। कोलकाता से लंदन तक के इस सफर में लगभग 20 हजार किलोमीटर की दूरी तय होती थी। 

कोलकाता से लंदन जाने में लगभग 45 दिन का वक्त लगता था। कंई जगहों पर यात्रा का दिन 48 तो कहीं कहीं 50 दिन भी बताया जाता है। 
कलकत्ता से लंदन तक की बस सेवा 1957 में शुरु हुई थी जो 1973 तक जारी रही। इस बस सर्विस की शुरुआत 15 अप्रैल 1957 को हुई थी। पहली बार 20 यात्रियों को बैठाकर यह बस लंदन से रवाना हुई जो 05 जून 1957 को कोलकाता पहुंची। वर्ष 1976 में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने लगा। इसकी वजह से यह बस सेवा बंद हो गई और फिर कभी शुरु नहीं हुई।

कलकत्ता से लंदन तक जाने का रुट भी बेहद दिलचस्प और एक हद तक जोखिम भरा था। मजेदार बात यह है कि इस बस सर्विस में जाने के लिए टिकटें पहले से रिजर्व करानी पड़ती थी। इससे पता चलता है कि बड़े पैमाने पर यात्री इस बस सर्विस का लाभ उठाया करते थें।

इस बस सर्विस की बात करें तो तब के कलकत्ता और आज के कोलकाता से यह बस सेवा शुरु होकर नई दिल्ली, अफगानिस्तान के काबुल, ईरान के तेहरान, इस्तांबुल, बेल्जियम, युगोस्लाविया, ऑस्ट्रिया, वेस्ट जर्मनी, बुल्गारिया के रास्ते अपनी मंजिल यानी लंदन तक पहुंचती थी। वापसी का रुट भी यही हुआ करता था। आज की तारीख में इनमें से कई मुल्कों के नक्शे बदल चुके हैं तो कई देश दुनिया के नक्शे से गायब हो चुके हैं।

कोलकाता से यह बस शुरु होकर बनारस, इलाहाबाद, आगरा, दिल्ली के रास्ते अमृतसर पहुंचती थी। जाहिर तौर पर कोलकाता से बनारस आने के क्रम में यह बस बिहार के कई इलाकों गया, औरंगाबद, सासाराम और कैमूर होते हुए ही जाती होगी। 

उस दौर के हिसाब से यह बस लग्जरी हुआ करती थी। लंबी दूरी की यात्रा होने की वजह से यात्रियों के आराम और दिनचर्या का पूरा ख्याल रखा जाता था। इस बस में स्लीपर बर्थ भी हुआ करता था। विंडो सीट यात्रियों की पसंद हुआ करती थी। यात्रा के बीच नजारे लेना तो हर किसी को भाता है। यह बस डबल डेकर यानी की दोमंजिला हुआ करती थी। बस में सैलून भी होता था। और स्टडी करने या किताबें पढ़ने के लिए भी रीडिंग लाउंज होती थी। बस में रेडियो और म्यूजिक सिस्टम पर लोगों की पसंदीदा हल्की हल्की संगीत भी चलता रहता था। बस में एक छोटा सा किचन और फैर ऑपरेटेड हीटर भी हुआ करता था जो लोगों को ठंड से बचाता था। 

कोलकाता से लंदन जाने वाले इस बस के आगमन और प्रस्थान का दिन पहले से तय रहता था। बीच रास्ते में अगर कोई पर्यटक स्थल या पिकनिक स्पॉट भी हुआ करता था तो ये बस लोगों को वहां घूमाती थी। बस सर्विस देने वाली अल्बर्ट टूर एंड ट्रैवल्स कंपनी बीच बीच में आराम के लिए अपने यात्रियों को होटल्स में ठहराने का इंतजाम भी करती थी। पूरे रास्ते यात्रियों को खिलाते पिलाते ले जाया जाता था। मतलब यह यात्रा आराम और सुविधाओं से लैस हुआ करती थी।

किराए की बात करें तो कोलकाता से लंदन या फिर लंदन से कोलकाता का एक तरफ का किराया 85 ब्रिटिश पाउंड होता था। बाद के दिनों में यह बढ़कर 145 पाउंड तक पहुंच गया। आज की तारीख से तुलना करें तो यह 2589 पाउंड बतना है यानी की भारतीय रुपया के हिसाब से 02 लाख 76 हजार रुपये। यहां पर इस बात का ध्यान रखना होगा कि तब से लेकर अब तक पाउंड के मुकाबले रुपये की कीमतों में बड़ी गिरावट हो चुकी है। 
इसमें बस का भाड़ा, नाश्ता, पानी, भोजन और रास्ते में होटल में रुकने का किराया भी शामिल करता था। बाद के दिनों में इस बस का किराया बढ़ते बढ़ते 305 डॉलर तक पहुंच गया था। 

बस के टिकट पर इस शर्त का भी जिक्र होता था कि अगर किन्हीं कारणों से भारत और पाकिस्तान की सीमाएं बंद हो गईं तो आपको पाकिस्तान के उपर से हवाई मार्ग से ले जाया जाएगा और इसके लिए टिकटों के शुल्क में बढ़ोतरी कर दी जाएगी। 

बस सर्विस देने वाली कंपनी यात्रियों से उनका पासपोर्ट और 10 फोटो साथ रखने को कहती थी। कई लोग अपना विजा का काम खुद से करवा लेते थें लेकिन कई लोगों की व्यवस्था कंपनी भी करवा देती थी। मतलब सुगम यात्रा के लिए कपंनी यात्रियों की सहायता भी करती थी।

हालांकि बाद के दिनों में ऐसी बस सर्विस को फिर से शुरु करने की मांग भारत में उठी लेकिन इस रुट के बीच में पड़ने वाले मुल्कों जैसे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान की स्थिति देखते हुए यह संभव नहीं लगता है। 

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