RCP की गाड़ी फंसी, जेडीयू में वापसी नामुमकिन, 09 साल में 58 प्लॉट खरीदने का आरोप

पिछले दिनों तेजी से चर्चा चली थी कि पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जेडीयू में वापसी होने वाली है लेकिन अब उनकी वापसी में पेंच फंस चुका है और उनका जेडीयू में आना नामुमकिन हो चुका है।

Jan 20, 2026 - 10:03
Jan 20, 2026 - 11:48
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RCP की गाड़ी फंसी, जेडीयू में वापसी नामुमकिन, 09 साल में 58 प्लॉट खरीदने का आरोप

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने दो टूक शब्दों में संदेश दे दिया है कि पार्टी को 72 से 42 पर लाने वालों के लिए पार्टी में अब कोई जगह नहीं है। उनका प्रहार सीधे जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह पर था, जिनकी जेडीयू में वापसी की अटकलें पिछले कुछ दिनों से चल रही थी।

बता दें कि एक समय में आरसीपी सिंह उर्फ रामचंद्र प्रसाद सिंह का बिहार की राजनीति में दबदबा था। आरसीपी सिंह ब्यूरोक्रेसी की दुनिया से राजनीति में आएं। आरसीपी सिंह आईएएस अधिकारी रहे हैं। वहीं से वो सीएम नीतीश कुमार के संपर्क में आएं। 

1984 बैच के आईएएस अधिकारी आरसीपी सिंह ने बतौर अधिकारी नीतीश कुमार के साथ काम करना शुरू किया। जब नीतीश कुमार केंद्र में रेल मंत्री और बाद में बिहार के मुख्यमंत्री बनें तो आरसीपी उनके सचिव रहें। आरसीपी और नीतीश दोनों ही कुर्मी समाज से आते हैं। 

आरसीपी का एक वक्त राजनीति में इतना दबदबा रहा कि वो जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक हो गए, फिर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बनें। राज्यसभा के सदस्य भी रहें। धीरे धीरे समय बीतता गया। आरसीपी और नीतीश के बीच दूरियां बढ़ने लगी। 

कहा जाता है कि नीतीश कुमार उस वक्त केंद्रीय मंत्रिमंडल में 02 सीटों की हिस्सेदारी चाहते थें लेकिन अति महत्वाकांक्षा में आरसीपी ने नीतीश कुमार की सहमति के बिना ही मोदी सरकार में मंत्री पद की शपथ ले ली। 

फिर एक वक्त ऐसा आया कि न तो आरसीपी राज्यसभा सांसद रहें और न जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष। उसके बाद वक्त का पहिया घूमा और उनके रास्ते नीतीश कुमार से अलग हो गए। आरसीपी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। 

आरसीपी के नाम पर विवाद तब भी खड़ा हुआ जब जेडीयू ने उन पर 09 साल में 58 प्लॉट खरीदने के आरोप लगाए। जेडीयू के अनुसार ही आरसीपी में नालंदा में करीब 40 बीघा जमीन खरीद ली है। इनमें से अधिकांश जमीनें आरसीपी की पत्नी गिरिजा सिंह, बेटियों लिपि सिंह और लता सिंह के नाम से खरीदी की।

जब नीतीश कुमार पुनः भाजपा के साथ आएं तो आरसीपी अप्रासंगिक हो गए। इसके बाद आरसीपी ने अपनी नई पार्टी बना ली। पार्टी का नाम रखा " आप सबकी आवाज "। पार्टी ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाई। पार्टी ने दम तोड़ दिया और उसका विलय प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज में कर दिया।

बीते विधानसभा चुनाव में जनसुराज की जो दुर्गति हुई, वो सबके सामने है। आरसीपी सिंह की बेटी लता सिंह ने नालंदा जिले की अस्थावां विधानसभा सीट से जनसुराज के टिकट पर चुनाव लड़ा और उनकी जमानत जब्त हो गई। लता सिंह को लगभग 16 हजार वोट प्राप्त हुए। 

अब आरसीपी के कदम जेडीयू की तरफ बढ़ रहे थें। उन्होंने एक मकर संक्रांति भोज में यह कहकर सबको चौंका दिया कि वो और नीतीश कोई अलग नहीं है। तभी से यह अटकल लगाई जाने लगी कि वो जेडीयू में कभी भी वापसी कर सकते हैं पर ललन सिंह ने उनके इस मंसूबे को ध्वस्त कर दिया है। 

हालांकि आरसीपी की वापसी का अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही लेना है। अगर नीतीश मान गए तो ललन सिंह की नाराजगी का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। 

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