जल्द होगा इस सीट पर उपचुनाव, अंदर ही अंदर तेजस्वी तैयारी में जुटें....जीत गए तो मिलेगी बड़ी ताकत

हम बात कर रहे हैं भोजपुर बक्सर स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र एमएलसी चुनाव की। पिछली बार इस सीट पर जेडीयू के राधाचरण साह उर्फ राधाचरण सेठ ने जीत हासिल की थी। हालिया संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में राधाचरण सेठ ने भोजपुर जिले की संदेश विधानसभा सीट से जीत हासिल कर ली और विधायक बन गए। इसकी वजह से भोजपुर बक्सर स्थानीय निकाय निर्वाचन सीट अब खाली हो चुकी है। ऐसे में इस सीट पर उपचुनाव होने तय हैं।

Feb 3, 2026 - 10:24
Feb 3, 2026 - 10:25
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जल्द होगा इस सीट पर उपचुनाव, अंदर ही अंदर तेजस्वी तैयारी में जुटें....जीत गए तो मिलेगी बड़ी ताकत

बिहार में जल्द ही विधान परिषद की एक सीट पर उपचुनाव होने वाला है। अंदर ही अंदर गुपचुप तरीके से राष्ट्रीय जनता दल इसकी तैयारियों में जुटा हुआ है। विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद आरजेडी इस सीट को जीतने की रणनीति बना रही है। यह सीट नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड की सीट है। अगर आरजेडी उपचुनाव में इस सीट को जीत लेने में कामयाब हो जाती है तो महागठबंधन यानी इंडिया गठबंधन का हौंसला बुलंद हो सकता है। पस्त पड़ चुके आरजेडी कार्यकर्ताओं में जोश आ सकता है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लिए यह एक बड़ा मौका होगा। 


हम बात कर रहे हैं भोजपुर बक्सर स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र एमएलसी चुनाव की। पिछली बार इस सीट पर जेडीयू के राधाचरण साह उर्फ राधाचरण सेठ ने जीत हासिल की थी। हालिया संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में राधाचरण सेठ ने भोजपुर जिले की संदेश विधानसभा सीट से जीत हासिल कर ली और विधायक बन गए। इसकी वजह से भोजपुर बक्सर स्थानीय निकाय निर्वाचन सीट अब खाली हो चुकी है।

ऐसे में इस सीट पर उपचुनाव होने तय हैं।  हम पिछली बार की बात करें तो एनडीए समर्थित जेडीयू उम्मीदवार राधाचरण सेठ ने आरजेडी उम्मीदवार अनिल सम्राट को 1038 वोट से हराया था। आरजेडी के लिए यह बड़ी हार थी। जबकि इसके पहले 2015 में राधाचरण सेठ आरजेडी के समर्थित उम्मीदवार थें और उन्होंने लोजपा के हुलास पांडेय को 329 वोटों से हराया था। हुलास पांडेय भी इस सीट से एमएलसी रह चुके हैं। लगभग 6000 वोटर इस चुनाव में अपने नए एमएलसी का चुनाव करेंगे। 


अब सवाल उठता है कि इस बार इस सीट पर आरजेडी किसे मैदान में उतारेगी और जेडीयू की ओर से कौन चुनाव लड़ेगा ! इंडिया गठबंधन के तहत इस सीट पर आरजेडी का दावा है। बाकी किसी भी सहयोगी ने दावा भी नहीं किया है। 


चर्चा चल रही है कि आरजेडी की ओर से दीपू रानावत यादव इस सीट से प्रत्याशी हो सकते हैं। दीपू रानावत यादव वहीं हैं जो विधानसभा चुनाव में संदेश विधानसभा सीट से महज 27 वोट से हार गए। उन्हें क्लोज फाइट में जेडीयू के राधाचरण सेठ ने हराया। दीपू रानावत यादव आरजेडी के प्रत्याशी थें। दीपू संदेश के पूर्व विधायक अरुण यादव के बेटे हैं। हालांकि दीपू की उम्र उनकी उम्मीदवारी में बाधक हो सकती है क्योंकि एमएलसी चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 30 साल उम्र होनी चाहिए। दीपू रानावत यादव ने पिछले विधानसभा चुनाव में जो जानकारी दी थी, उसके अनुसार उनकी उम्र 28 साल ही है। वहीं पूर्व आरजेडी प्रत्याशी अनिल सम्राट एक्टिव दिखाई नहीं दे रहे हैं।

ऐसे में संभव है कि पूर्व विधायक अरुण यादव और दीपू रानावत यादव के परिवार का ही कोई सदस्य उपचुनाव में आरजेडी का प्रत्याशी होगा। क्योंकि इस चुनाव को लड़ना कोई साधारण बात नहीं है, इसके लिए भारी भरकम संसाधन वाले उम्मीदवार की जरुरत होती है। 


जाहिर तौर पर तेजस्वी यादव का अभी सबसे पहला काम अपने कार्यकर्ताओं के मनोबल को उपर उठाना है। भोजपुर बक्सर एमएलसी चुनाव उनके लिए एक बड़ा मौका है। भले ही इसमें जनता वोट नहीं करती लेकिन चुनावी जीत हार उत्साहित और निराश तो करती ही है। रिपोर्ट्स के अनुसार तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी इस सीट को लड़ने और जीतने के लिए मंथन कर रही है। 


वहीं एनडीए की बात कर लें तो लोजपा रामविलास के नेता हुलास पांडेय के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है। हुलास पांडेय इस सीट से एमएलसी रह चुके हैं। उनके भतीजे विशाल प्रशांत भोजपुर जिले की तरारी सीट से विधायक भी हैं। उनके भाई सुनील पांडेय भी इस इलाके के चर्चित नेता हैं। वहीं राधाचरण सेठ के परिवार के सदस्यों की निगाहें भी इस सीट पर है। हालांकि अभी तक उपचुनाव की घोषणा नहीं हुई है लेकिन ये उपचुनाव हर हाल में रोचक और दिलचस्प होंगे और सबकी निगाह इनके नतीजों पर बनीं रहेगी। 


बता दें कि इस एमएलसी चुनाव में स्थानीय निकाय के जीते हुए जनप्रतिनिधि मतदान करते हैं। इनमें वार्ड सदस्य, जिला पार्षद, मुखिया, बीडीसी, नगर निकायों के पार्षद और क्षेत्र के विधायक, सांसद भी मतदान करते हैं। यह चुनाव साधारण चुनाव नहीं होता है, इसमें बड़े पैमाने पर पैसे खर्च होते हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस एमएलसी का चुनाव का बजट 08 से 10 करोड़ के बीच होता है। अलग अलग सीटों पर बजट अलग अलग होते हैं। बिहार की कई सीटों पर यह आंकड़ा 10 करोड़ के भी पार चला जाता है। स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधियों द्वारा चुनी जाने वाली ऐसी सीटों की संख्या 24 है। 

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