Jharkhand News: झारखंड के आबकारी विभाग में 5 करोड़ का घोटाला सामने आया! फर्जी पत्र ने हिला दी झारखंड हाईकोर्ट की दीवारें
Jharkhand News: झारखंड में आबकारी विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है जहां संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह से एसीबी ने पूछताछ की है। मसलन Vision Hospitality Service and Consultants Private Limited नाम की एजेंसी ने 12 अगस्त 2023 को 5.35 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा कराई थी। बाद में इस एजेंसी ने 28 दिसंबर 2023 को पुरानी गारंटी बदलकर नई बैंक गारंटी दे दी। एजेंसी ने तर्क दिया कि उसके मैनेजमेंट में बदलाव हुआ है इसलिए बैंक गारंटी बदली गई है।
Jharkhand News: झारखंड में आबकारी विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है जहां संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह से एसीबी ने पूछताछ की है। मसलन Vision Hospitality Service and Consultants Private Limited नाम की एजेंसी ने 12 अगस्त 2023 को 5.35 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा कराई थी। बाद में इस एजेंसी ने 28 दिसंबर 2023 को पुरानी गारंटी बदलकर नई बैंक गारंटी दे दी। एजेंसी ने तर्क दिया कि उसके मैनेजमेंट में बदलाव हुआ है इसलिए बैंक गारंटी बदली गई है। सवाल यह उठा कि आखिर क्यों आबकारी विभाग के किसी अधिकारी ने इस बैंक गारंटी की सही जांच नहीं की और गजेंद्र सिंह ने सिर्फ इतना कहा कि यह काम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर किया गया था।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर चली पूरी प्रक्रिया
गजेंद्र सिंह ने पूछताछ में माना कि सारा काम केवल वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर किया गया। जब एसीबी ने उनसे पूछा कि विभाग ने खुद बैंक गारंटी की जांच क्यों नहीं की तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। विभाग के आईटी मैनेजर अमर कुमार मेहता और लेखाकार अमित कुमार से भी एसीबी ने सवाल किए और 19 मार्च 2025 को एसीबी को दी गई रिपोर्ट के आधार पर पूछताछ की गई। जब संबंधित बैंकों ने स्पष्ट कर दिया कि बैंक गारंटी फर्जी है और बैंक ने इसे जारी ही नहीं किया है तब विभाग ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की यह बड़ा सवाल बना रहा।
पूछताछ में यह सामने आया कि विभाग ने केवल एजेंसी संचालक से सफाई मांगने तक ही कार्रवाई सीमित रखी। गजेंद्र सिंह ने बताया कि 8 अप्रैल 2025 को एजेंसी संचालक से स्पष्टीकरण मांगा गया था। एजेंसी ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अपने स्थानीय प्रतिनिधियों नीरज कुमार सिंह और श्याम शरण पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। इस पूरे मामले में एजेंसी ने यह दावा किया कि उसकी जानकारी के बिना स्थानीय स्तर पर यह घोटाला किया गया और विभाग भी उनके जवाब पर भरोसा करता रहा।
हाईकोर्ट में भी फर्जी दस्तावेज दाखिल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले में नीरज कुमार सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट में भी फर्जी पत्र दाखिल किया था। यह पत्र बैंक गारंटी के विस्तार से जुड़ा हुआ था। इस पूरे मामले ने न सिर्फ एजेंसी की साख पर सवाल खड़े किए बल्कि आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए। कोर्ट में फर्जी दस्तावेज दाखिल करना एक बड़ा अपराध है लेकिन इसके बावजूद विभाग ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया।
एसीबी की पूछताछ में धीरे-धीरे मामले की परतें खुल रही हैं। एजेंसी के बहाने और विभाग की लापरवाही ने मिलकर इस घोटाले को जन्म दिया। अब सवाल उठता है कि क्या वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही गाज गिरेगी। झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत यह मामला एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। एसीबी की रिपोर्ट आने के बाद साफ होगा कि इस घोटाले में कौन-कौन शामिल था और किसकी भूमिका सबसे बड़ी थी।
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