बिहार सरकार का हर 5वां रुपया उधारी का, बढ़ता जा रहा कर्ज, कमाई सुस्त
प्रतिष्ठित मीडिया समूह दैनिक भास्कर ने बिहार की वित्तीय स्थिति पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए बताया है कि बिहार सरकार का हर 5वां रुपया उधारी का है। राज्य सरकार को अगले 7 सालों में 1.57 लाख करोड़ रुपए कर्ज चुकाने होंगे।
बिहार की वित्तीय स्थिति बेहद चिंताजनक हाल में है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार बिहार राज्य की अपनी आमदनी की रफ्तार थम चुकी है। आज की स्थिति यह बन चुकी है कि राज्य सरकार अपना हर पांचवां रुपया कर्ज लेकर खर्च कर रही है। भारत सरकार के समाजशास्त्र अनुसंधान परिषद् और CAG के ताज़ा मंथन में यह तथ्य निकल कर सामने आया है।
यह बातें 2024-25 के बिहार के बजटीय प्रबंधन के हवाले से सामने आईं हैं। FRBM कानून के तहत इसकी सीमा 3.50% निर्धारित है लेकिन हमारा बिहार इसे लांघ कर 4.16% पर पहुंच चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार बिहार राज्य के कुल कर्ज का लगभग 50% हिस्सा यानी लगभग 1.57 लाख करोड़ रुपया अगले 7 वर्षों के भीतर चुकाना होगा।
वहीं भास्कर ने अपने एनालिसिस में बताया है कि बिहार के पास देश की 10 प्रतिशत आबादी है लेकिन देश की GDP में योगदान सिर्फ 3 प्रतिशत है। बिहार अपनी 70 प्रतिशत से ज्यादा जरूरतों के लिए केंद्र पर निर्भर है। नीति आयोग के ' फिस्कल हेल्थ इंडेक्स ' में 17 राज्यों की लिस्ट में बिहार का नंबर 12वाँ है।
वहीं इस विषय पर एक्सपर्ट प्रोफेसर प्राची मिश्रा का विचार है कि बिहार को इस स्थिति से उबरना है तो ओडिशा माॅडल अपनाना होगा। राज्य को अपना टैक्स बेस बढ़ाना होगा। खनन रॉयल्टी की चोरी रोकनी होगी। गैर उत्पादक सब्सिडी घटाकर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाना होगा।
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