छोटू गैस सिलेंडर की किल्लत, छात्र और मजदूर हुए लाचार
सरकार और प्रशासन के दावों के उलट राजधानी पटना में छोटे और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी से यहां रहकर तैयारी करने वाले छात्रों और दिहाड़ी मजदूरों की समस्या बढ़ गई है।
बिहार की राजधानी पटना में छोटे रसोई गैस सिलेंडर की कमी का साफ असर दिनचर्या पर दिखने लगा है। राजधानी पटना के मुसल्लहपुर हाट और बोरिंग रोड जैसे इलाकों में रहकर पढ़ने वाले छात्रों के लिए मुसीबत बन गया है। वहीं दिहाड़ी मजदूरों के लिए भी छोटू गैस सिलेंडर की किल्लत परेशानी का सबब बन गया है।
वहीं छोटे ठेला संचालक से लेकर ढाबा और रेस्टोरेंट संचालक भी कमर्शियल गैस सिलेंडर को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से पेट्रोलियम कंपनियों और प्रशासन दावा करती आ रही है कि छोटे गैस सिलेंडर उपलब्ध हैं लेकिन यह दावा जमीन पर आकर असत्य साबित हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार छोटू गैस सिलेंडर की आपूर्ति बेहद कम कर दी गई है।
इस वजह से राजधानी में गैस संकट की स्थिति बन गई है। ठेले पर चाय नाश्ता बेचने वालों से लेकर, तैयारी करने वाले छात्रों, किरायेदारों, मजदूरों के लिए परेशानी साफ साफ दिखाई दे रही है। इस गैस संकट से राजधानी पटना और उसके आसपास के 01 लाख लोग इस संकट से प्रभावित हैं। इनमें से अधिकांश ऐसे लोग हैं जिनके पास रेगुलर LPG कनेक्शन नहीं है।
पेट्रोलियम कंपनियों का दावा है कि एक आईडी पर किसी भी एजेंसी या पेट्रोल पंप से 1605 रुपए देकर 05 किलोग्राम वाला छोटू गैस सिलेंडर लिया जा सकता है और उसके खाली होने के बाद लगभग 500 रुपए देकर दूसरा सिलेंडर लिया जा सकता है।
पहले आसानी से लोग छोटू गैस सिलेंडर की रिफिलिंग करा लिया करते थें या फिर वेंडर से गैस सिलेंडर ले लिया करते थें। होली के बाद से ही किल्लत का दौर शुरू हो चुका है। यह कब तक चलेगा, यह किसी को नहीं मालूम।
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