तेजस्वी के समर्थन से अगर प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे तो कैसे समीकरण बन सकते हैं !
बांकीपुर विधानसभा सीट पर लगभग हर चुनाव में भाजपा को 60 प्रतिशत और उसके आसपास वोट मिलते रहे हैं और इस आंकड़े की वजह से जीत का मार्जिन काफी ज्यादा होता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि हार की संभावना के बावजूद क्या प्रशांत किशोर इतना बड़ा रिस्क ले सकते हैं। अगर सच में अगर प्रशांत किशोर इस सीट से चुनाव लड़ जाते हैं और आरजेडी उनको समर्थन करती है तो बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
बिहार की राजनीति में एक बड़ी खबर चल रही है कि जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ सकते हैं। इसी के साथ एक चौंकाने वाली खबर यह है कि आरजेडी इस सीट पर प्रशांत किशोर को समर्थन दे सकता है। वैसे इस खबर की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है।
बांकीपुर राजधानी पटना की वो सीट है जो भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ है। लंबे समय से यहां से नितिन नवीन विधायक होते आ रहे थें। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन राज्यसभा चले गए और यह सीट उनके इस्तीफ से खाली हो गई है। नितिन नवीन से पहले उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से विधायक हुआ करते थें।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर लगभग हर चुनाव में भाजपा को 60 प्रतिशत और उसके आसपास वोट मिलते रहे हैं और इस आंकड़े की वजह से जीत का मार्जिन काफी ज्यादा होता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि हार की संभावना के बावजूद क्या प्रशांत किशोर इतना बड़ा रिस्क ले सकते हैं। अगर सच में अगर प्रशांत किशोर इस सीट से चुनाव लड़ जाते हैं और आरजेडी उनको समर्थन करती है तो बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
2025 में हुए विधानसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा के प्रत्याशी नितिन नवीन को 98,299 वोट मिलें जबकि आरजेडी की प्रत्याशी रेखा गुप्ता को 46,363 वोट हासिल हुए थें। तीसरे स्थान पर जनसुराज की वंदना कुमारी को 7,717 वोट मिले थें। नितिन नवीन की जीत लगभग 52 हजार वोट से हुई थी।
चूंकि प्रशांत किशोर बिहार में नया राजनीतिक विकल्प लेकर आए थें और उनकी बातों की सराहना भी हुई थी लेकिन जैसा की बिहार की राजनीति में हमेशा ऐसा होता आया है कि आखिरी फैसला जाति करती है। जातीय गोलबंदी ही जीत हार तय करती है। तमाम प्रयासों के बावजूद जातीय गोलबंदी की वजह से जनसुराज कामयाब नहीं हो सका। हालांकि हर सीट पर जनसुराज को कुछ न कुछ वोट हासिल हुए। प्रशांत किशोर दूसरों के लिए चुनाव प्रबंधन करने के लिए जाने जाते हैं।
अगर बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र मंे प्रशांत किशोर माइक्रो बूथ मैनेजमेंट करने में सफल हो जाएं। तेजस्वी यादव, कांग्रेस, मुकेश सहनी और कम्युनिस्ट पार्टियों का ईमानदार समर्थन मिल जाए। एकजुट प्रयास हो जाए। आरजेडी के यादव मुस्लिम के अलावा वीआईपी का मल्लाह वोट, कांग्रेस और कम्युनिस्ट का कैडर वोट मिल जाए और सबसे बड़ी बात प्रशांत किशोर की ब्राह्मण जाति का वोट वो खींच ले जाएं। प्रशांत किशोर की अपनी भी एक मजबूत छवि है और सबसे बड़ी बात की वो बुद्धिजीवी वर्ग में सक्रिय हैं।
ईधर यूजीसी के नए एक्ट को लेकर सामान्य वर्ग भाजपा से काफी दुखी भी और आक्रोशित भी है। उधर सम्राट चौधरी के सीएम बनने और नीतीश कुमार के पद से हटने के बाद बिहार में तमाम राजनीतिक समीकरण इधर से उधर हो चुके हैं। अगर ये तमाम फैक्टर एकजुट हो जाए तो बांकीपुर विधानसभा सीट से बिहार के लिए एक नया संदेश निकल कर सामने आ सकता है। प्रशांत किशोर को भाजपा से उसका 20 फीसदी वोट छीनना होगा। अगर सच में प्रशांत किशोर बांकीपुर से चुनाव लड़ जाएं और उन्हें आरजेडी का समर्थन हासिल हो जाए तो यहां लड़ाई सीधा कायस्थ बनाम ब्राह्मण हो जाएगा।
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