क्या बिहार का खजाना खाली हो चुका है ? क्या बिहार दिवालिया हो रहा है ? तेजस्वी के सवाल से मचा सियासी भूचाल....
तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा है कि क्या बिहार दिवालिया होने की कगार पर है ? जाहिर तौर पर सत्ता पक्ष इसे कभी स्वीकार नहीं करता और भाजपा जेडीयू की ओर से यह जवाब भी आ गया कि ऐसा कुछ भी नहीं है। तेजस्वी यादव खुद भी गुमराह हैं और पब्लिक को भी गुमराह करना चाहते हैं लेकिन तेजस्वी यादव अपने मकसद में नाकामयाब होंगे।
जिस प्रदेश में जब पेंशन देने के लिए इमरजेंसी फंड का उपयोग होने लगे तो समझ जाइए कि हालात कितने खराब हैं !
आज की तारीख में बिहार की आर्थिक स्थिति कैसी है ? इसे लेकर जैसी मुंह वैसी बातें पिछले दो तीन महीनों से हो रही हैं। अब तक ये चर्चा चाय और पान की गुमटियों तक सीमित थी। अब इसे हवा दे दी है नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने। तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा है कि क्या बिहार दिवालिया होने की कगार पर है ? जाहिर तौर पर सत्ता पक्ष इसे कभी स्वीकार नहीं करता और भाजपा जेडीयू की ओर से यह जवाब भी आ गया कि ऐसा कुछ भी नहीं है। तेजस्वी यादव खुद भी गुमराह हैं और पब्लिक को भी गुमराह करना चाहते हैं लेकिन तेजस्वी यादव अपने मकसद में नाकामयाब होंगे।
लेकिन तेजस्वी यादव ने जो कुछ भी कहा है वो ठोस प्रमाण के साथ कहा है। तेजस्वी ने कहा कि मई, जून और जुलाई महीने के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने के लिए बिहार आकस्मिकता निधि का प्रयोग किया जा रहा है। आकस्मिकता निधि का उपयोग तभी होता है जब संकट का समय हो। जैसे कोई प्राकृतिक आपदा हो, अप्रत्याशित संकट हो या आर्थिक विपत्ति जैसी इमरजेंसी में इस फंड का उपयोग होता है। इससे तो साफ हो जाता है कि बिहार के खजाने की हालत अच्छी नहीं है।
तेजस्वी ने कहा कि ये सब देखते हुए साफ है कि बिहार के आर्थिक हालात बेहद खराब हैं। कर्मचारियों को वेतन और पेंशन देने में दिक्कत आ रही है। सरकारी खजाना खाली हो चुका है। ठेकेदारों का भी भुगतान रुका हुआ है। बिजली में भारी कटौती की जा रही है। तेजस्वी के इस बयान ने एक तरह से सियासी भूचाल आ गया।
तेजस्वी यहीं नहीं रुकते हैं वो आगे कहते हैं कि जो योजनाएं वर्ष 2023-24 में स्वीकृत हुई हैं, उनका काम अब तक शुरु नहीं हो सका है। तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि बिहार के छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशीप योजनाओं और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना भी पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद राज्य में ऐसे हालात क्यों बन गए हैं ?
उधर जेडीयू के प्रवक्ता और पूर्व मंत्री नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव के बयान पर सरकार का बचाव करते हुए कहा कि तेजस्वी यादव अज्ञानता के कारण अफवाह फैला रहे हैं। वो खुद भ्रमित हैं लेकिन राज्य की जनता गुमराह होने वाली नहीं है। नीरज कुमार ने कहा कि बिहार आकस्मिकता निधि कोई अतिरिक्त निधि कोई अतिरिक्त निधि नहीं है बल्कि यह बजटीय उपबंध की एक स्थापित प्रक्रिया मात्र है। सरकार का प्रत्येक व्यय विधानमंडल से प्राप्त स्वीकृति के आधार पर ही होता है। अब नीरज कुमार के जवाबों की क्या विश्वसनीयता है, ये सबको पता है। नीरज कुमार के तर्कों का जवाब सिर्फ आरजेडी प्रवक्ता बंटू सिंह ही दे सकते हैं।
वहीं बिहार के भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री डॉ दिलीप जायसवाल ने तेजस्वी यादव के दावों को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोई वित्तीय संकट नहीं है। सभी को समय पर वेतन मिल रहा है। उन्होंने तेजस्वी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर तेजस्वी को कोई संकट नजर आता है तो उनके पास जितना पैसा जमा है, उसे वे सरकार को दान कर दें। इससे संकट थोड़ा दूर हो जाएगा। अब देखिए दुर्भाग्य की बात, बिहार सरकार का एक मंत्री एक गंभीर विषय पर तंज कसता हुआ दिखाई दे रहा है। तथ्यों और आंकड़ों के साथ नेता प्रतिपक्ष की बातों का जवाब देना चाहिए तो यह कह रहे हैं कि तेजस्वी यादव के पास जितना पैसा जमा है, उसे सरकार को दे देना चाहिए। इससे ज्यादा हल्की बात क्या हो सकती है ! डॉ दिलीप जायसवाल तो एक जाने माने ईमानदार और चरित्रवान नेता हैं। इससे ज्यादा उनसे उम्मीद भी करना बेकार है।
वहीं बिहार के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने यह साफ किया कि राज्य कैबिनेट द्वारा आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये की निकासी की मंजूरी को तेजस्वी अतिरिक्त राशि बता रहे हैं जबकि यह पूरी तरह से बजटीय प्रक्रिया का हिस्सा है। जब विधानमंडल का सत्र नहीं चल रहा होता है तब आपातकालीन या जरुरी खर्च इसी निधि से किए जाते हैं। जिसकी मंजूरी बाद में सदन सत्र में ली जाती है। इसमें कुछ भी नियम के विरुद्ध नहीं है।
वहीं तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि पिछले चार पांच महीनों से बिहार में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि फंड की कमी से कैबिनेट में पूर्व से चली आ रही बिहार राज्य फसल सहायता योजना को भी बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं तेजस्वी यादव ने सीएम सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा कि नौसिखिए मुख्यमंत्री को गैर जरुरी मुद्दों को हवा देने की बजाय अविलंब प्रदेश की दयनीय वित्तीय स्थिति को लेकर चिंतित, भयभीत और आशंकित बिहारवासियों को संबोधित करना चाहिए। तेजस्वी यादव ने साफ तौर पर कहा कि बिहार के वित्तीय हालात चिंताजनक हैं। मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए।
अब जबकि सरकार को नेता प्रतिपक्ष के बयानों पर जवाब देना चाहिए था, सरकार के मंत्री और प्रवक्ता तंज की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले 21 साल से राज्य में एनडीए की सत्ता है, इसके बावजूद इन सबकी सूई आज तक लालू पर ही अटकी हुई है जैसे केंद्र की सूई अभी तक नेहरु जी पर फंसी हुई है। सरकार में बैठे लोगों की जवाबदेही है कि लोगों की शंकाओं का निवारण करें और जो सच है, उसे सामने लाए।
यही सब तंज कसने वाली प्रवृति के चक्कर में बिहार और बिहारियों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत की अर्थव्यवस्था में बिहार का योगदान अब भी तीन प्रतिशत से कम बना हुआ है। बिहार की जीडीपी हिस्सेदारी महज 2.9 प्रतिशत है। बिहार में प्रति व्यक्ति आय लगभग 69 हजार रुपये है जबकि गोवा और सिक्किम के नागरिक बिहारियों की तुलना में आठ गुना ज्यादा कमाई कर रहे हैं।
आज भी बिहार के नौजवान जब रेल के जनरल डब्बे में मवेशियों की तरह ठूंस ठूंस कर मजदूरी करने के लिए दूसरे राज्यों में जाने के लिए लाचार और मजबूर हैं तो उसके लिए ऐसे ही मंत्री जिम्मेदार हैं जो लंबे समय से सत्ता में बैठे मलाई मार रहे हैं और कोई गंभीर सवाल उठाता है तो उस पर तंज कसना शुरु कर देते हैं। लगता है कि इनकी ड्यूटी तंज कसने के लिए ही लगाई गई है।
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