15 लाख बिहारी रहते हैं बंगाल में, नई सरकार के गठन में होगी बड़ी भूमिका....

एक आंकड़े के अनुसार लगभग 15 लाख बिहारी पश्चिम बंगाल में रहते हैं। नई सरकार के गठन में बंगाल में रहने वाले प्रवासी बिहारियों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। बिहारी मूल के कई नेताओं को टीएमसी, बीजेपी, कांग्रेस और सीपीआईएम ने भी उम्मीदवार बनाया है।

Mar 29, 2026 - 20:23
Mar 29, 2026 - 20:28
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15 लाख बिहारी रहते हैं बंगाल में, नई सरकार के गठन में होगी बड़ी भूमिका....

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार प्रसार जोरों पर है। सीएम ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी यहां वापसी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है तो वहीं केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी यहां सरकार बनाने के लिए कोई कोर कसर बाकी छोड़ना नहीं चाहती। एक आंकड़े के अनुसार लगभग 15 लाख बिहारी पश्चिम बंगाल में रहते हैं। नई सरकार के गठन में बंगाल में रहने वाले प्रवासी बिहारियों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। बिहारी मूल के कई नेताओं को टीएमसी, बीजेपी, कांग्रेस और सीपीआईएम ने भी उम्मीदवार बनाया है। 

कोलकाता महानगर के हर हिस्से में आपको बिहार के लोग मिल जाएंगे। कोलकाता महानगर क्षेत्र के अतिरिक्त हावड़ा, आसनसोल, दुर्गापुर, रानीगंज, वर्धमान, मालदा, मुर्शिदाबाद, हुगली, उत्तर 24 परगना में भी बड़ी संख्या में बिहार के लोग रहते हैं। इनमें से अधिकांश लोग तो ऐसे हैं जिनकी दूसरी तीसरी पीढ़ी यहां रह रही है। बंगाल में रहने वाले बिहारी अपनी भाषा भोजपुर, मैथिली के साथ साथ बांग्ला भी सहजता के साथ बोलते हैं और बंगाली संस्कृति में घुल मिल गए हैं। 

बंगाल में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार मिल जाएंगे जिनके बेटे बेटियों की शादी बंगाली परिवारों में हुई है। हालांकि इन सबके बावजूद पश्चिम बंगाल में कई ऐसे संगठन हैं जो बंगाल में बिहारियों की बढ़ती आबादी को ठीक नहीं मानते हैं। उनका मानना है कि बिहारी बंगाल में रहकर मूल बंगालियों का हक मार रहे हैं। उनके संसाधनों पर, रोजगार की संभावनाओं पर कब्जा कर रहे हैं। वैसे ऐसे तत्वों की संख्या काफी कम है। 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं। इनमें से लगभग 50 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां जीत और हार यूपी, बिहार और झारखंड से जाकर बसे लोग तय करते हैं। सीएम ममता बनर्जी छठ महापर्व के दौरान अच्छी खासी सक्रिय दिखाई देती हैं। छठ घाटों का दौरा करती हैं। बिहार के लोगों को बधाई देती हैं। प्रसाद ग्रहण करती हैं। यहां तक की छठ पूजा के अवसर पर बंगाल में 02 दिनों की सरकारी छुट्टी का प्रावधान भी ममता सरकार ने किया हुआ है। 

इन सबके बावजूद बिहारी मूल के लोगों का स्पष्ट रुझान यहां भाजपा की ओर दिखाई देता है। वैसे बिहारी मूल के शत्रुध्न सिन्हा और कीर्ति आजाद यहां ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस से सांसद हैं। लंबे समय तक कांग्रेस में रहें संतोष पाठक फिलहाल भाजपा में हैं और चौरंगी से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा ने बिहार के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस बार बंगाल चुनाव में लगा रखा है। 

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SIMRANJEET SINGH Diploma in media studies ( Ranchi ),8 years experience in news media, Political Expert Chief editor in Bihar News