संघ मुख्यालय में BJP के मुख्यमंत्री की चाबी ! नागपुर परिक्रमा शुरू है...
बिहार में नए मुख्यमंत्री का आना निश्चित है। कौन बनेगा मुख्यमंत्री की दौड़ पटना से दिल्ली और दिल्ली से नागपुर की परिक्रमा जारी है। इस परिक्रमा ने बिहार की राजनीति को गरमा दिया है।
Bihar Politics भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका से पूरा देश परिचित है। RSS भाजपा की मातृ संगठन है। भाजपा संगठन और केंद्र की सरकार...दोनों जगह तमाम बड़े फैसलों में संघ की अहम भूमिका होती है।
बिहार का " कौन होगा अगला मुख्यमंत्री " इसकी आंच संघ मुख्यालय, नागपुर तक पहुंच चुकी है। नागपुर के दरबार में भी चिंतन मंथन का दौर शुरू हो चुका है। वैसे तो बिहार की सत्ता में पिछले 20 साल से भाजपा हिस्सेदार है पर 2026 में ऐतिहासिक रूप से पहली बार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री होगा।
ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भी भाजपा को दिशानिर्देश अथवा मार्गदर्शन मिलना तय है। बिहार का नया मुख्यमंत्री तय करने में संघ का मार्गदर्शन बड़ी भूमिका तय करेगा। ऐसे में कुछ नाम हैं जो एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
संघ मुख्यालय की परिक्रमा करने वाले जिन नामों की चर्चा मीडिया रिपोर्ट्स में हो रही है उनमें दीघा विधायक संजीव चौरसिया, डॉ प्रेम कुमार और रमा निषाद का नाम महत्वपूर्ण है।
संजीव चौरसिया की बात करें तो इनका पूरा परिवार RSS की पृष्ठभूमि से आता है। इनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया पुराने संघी हैं। एक दौर में जब भाजपा बिहार में बेहद कमजोर हुआ करती थी, तब संघ और भाजपा के जितने भी नेताओं, कार्यकर्ताओं, प्रचारकों का प्रवास पटना में होता था, वो इनके घर पर ही होता था। गंगा प्रसाद चौरसिया को लोग प्रेम से गंगा बाबू कहते थें। विचारधारा और संगठन के प्रति बेहद ईमानदार रहे गंगा बाबू पहले एमएलसी और बाद में राज्यपाल भी बनें। उन्हीं के पुत्र संजीव चौरसिया हैं जो पटना की दीघा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और सीएम पद के प्रबल दावेदार भी हैं।
रमा निषाद के बारे में आपको बता दें कि ये मुजफ्फरपुर जिले की औराई विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की विधायक हैं। इनके पति अजय निषाद मुजफ्फरपुर से लोकसभा सांसद रह चुके हैं। रमा निषाद अति पिछड़े वर्ग के अंतर्गत मल्लाह समाज से आती हैं। अगर बात आधी आबादी को बिहार सौंपने की आई तो रमा निषाद भी संघ की पसंद हो सकती हैं क्योंकि बिहार में एनडीए की लगातार सरकार की सबसे बड़ी वजहों में महिला वोटर्स ही मानी जाती हैं।
बिहार को जानने वाला हर शख्स डॉ प्रेम कुमार को एक गंभीर राजनेता के तौर पर देखता है। डॉ प्रेम कुमार 09 बार गया से विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। कई विभागों के मंत्री रहें डॉ प्रेम कुमार संघ के बेहद करीबी माने जाते हैं। वर्तमान में वो बिहार विधानसभा के स्पीकर हैं।
दरअसल बिहार को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सबसे बड़ी चिंता नीतीश कुमार जैसे कुशल प्रशासक की छवि वाला नेता खड़ा करना है। बिहार को जिस तरह से नीतीश कुमार से सजाया और संवारा है, नक्सल और अपराध मुक्त बनाया है..वैसा कोई चेहरा संघ बिहार को देना चाहता है। यही वजह है कि बिहार के नए मुख्यमंत्री के लिए संघ मार्गदर्शन से पूर्व सभी चेहरों के नाम पर गहरा चिंतन मंथन कर रहा है।
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