उपेन्द्र कुशवाहा और चिराग पासवान के बीच जल्द शुरू होगा राजनीतिक घमासान !
अभी सरकार बनें एक महीना भी नहीं हुआ कि एनडीए के भीतर ही संघर्ष शुरू हो चुका है....
जिस तरीके से केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के मुख्य प्रवक्ता को पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी में शामिल कराया, वो गठबंधन धर्म के हिसाब से सही तो नहीं ही कहा जा सकता है...
अरविंद कुमार वाजपेई चिराग पासवान की पार्टी का एक ऐसा चेहरा थें जो हर शाम न्यूज चैनलों की डिबेट में नजर आते थें हालांकि कई लोगों का मानना है कि वो प्रवक्ता तो लोजपा रामविलास के थें लेकिन कई बार वो भाजपा के प्रवक्ता लगने लगते थें। खैर, इसमें कोई दिक्कत की बात भी नहीं है...भाजपा और लोजपा में कोई खास फर्क तो है नहीं...लोजपा ही भाजपा है और भाजपा ही लोजपा है का नारा तो आपको याद ही होगा...
और वैसे भी चिराग पासवान तो पीएम मोदी के हनुमान माने जाते हैं। गूगल पर जाकर लिखिए हनुमान ऑफ मोदी तो सीधे चिराग पासवान का चेहरा ही नजर आएगा...
खैर, बात करते हैं एनडीए के अंदरूनी घमासान की तो चिराग के प्रवक्ता को उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी में शामिल करा लिया या यूं कहें कि तोड़ लिया...चिराग तो अन्दर ही अन्दर खूब ब रहे होंगे। चिराग़ इसका हिसाब किताब उपेंद्र कुशवाहा से जरूर लेंगे।
वैसे भी इन दिनों चिराग पासवान का समय काफी अच्छा चल रहा है। चिराग़ पासवान की राजनैतिक हैसियत दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है, हालांकि जिस प्रकार से बिहार में नई सरकार बनने के बाद दलितों और खासकर पासवान समाज के आशियाने पर सरकारी बुलडोजर चला है, उससे चिराग के वोटर दुखी हैं लेकिन जाति की राजनीति जो न करवा दे...
जाति है कि जाती नहीं। चाहे कुछ भी हो जाए पर चिराग के वोटर उनको छोड़ेंगे नहीं। ऐसे में चिराग की मजबूती पर कोई सवाल खड़े नहीं कर सकता...
चिराग़ अपनी मजबूती और राजनैतिक हैसियत का फायदा जरूर उठाएंगे और उपेंद्र कुशवाहा को इसका राजनैतिक रूप से सबक जरूर सिखाएंगे। बस वक्त का इंतजार कीजिए...
चिराग़ से पंगा लेकर आज उनके चाचा पशुपति कुमार पारस और प्रिंस राज किस हाल में है, ये सबके सामने है..
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