रोहिणी आचार्य: राजनीति छोड़ी, परिवार से नाता तोड़ा – Bihar Politics में भूचाल

Nov 16, 2025 - 08:57
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रोहिणी आचार्य: राजनीति छोड़ी, परिवार से नाता तोड़ा – Bihar Politics में भूचाल

लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने और अपने परिवार से नाता तोड़ने की घोषणा करके बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया एक्स पर लिखी उनकी पोस्ट ने न सिर्फ आरजेडी खेमे में चिंता बढ़ा दी, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि लालू परिवार के भीतर का तनाव अब खुलकर सामने आ चुका है।

रोहिणी, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के नौ बच्चों में दूसरे नंबर पर हैं। वे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव की बड़ी बहन हैं। उनका राजनीति से अचानक संन्यास और परिवार से दूरी का ऐलान कई लोगों को चौंकाने वाला लगा, खासकर इसलिए क्योंकि यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी के कमजोर प्रदर्शन के बाद आया है। हालांकि, परिवार में तनाव की स्थिति काफी पहले से बन चुकी थी। तेजप्रताप यादव का पार्टी से निष्कासन और तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले संजय यादव का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव इस टूट की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।

लेकिन सवाल उठता है—रोहिणी आचार्य कौन हैं और उनकी पहचान इतनी महत्वपूर्ण क्यों मानी जाती है?
रोहिणी दिसंबर 2022 में तब सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने अपने पिता लालू यादव को किडनी दान कर दी। इसके बाद लोग उन्हें “किडनी देने वाली बेटी” के नाम से जानने लगे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सारण सीट से चुनाव लड़ा, जहां से उनके पिता चार बार जीत चुके थे। हालांकि, रोहिणी को यहां राजीव प्रताप रूडी से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके भाषणों और शैली ने आरजेडी समर्थकों में नई ऊर्जा पैदा कर दी थी।

अब बात आती है—उनके नाम में ‘आचार्य’ कैसे जुड़ा?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, उनका उपनाम एक भावनात्मक किस्से से जुड़ा है। बताया जाता है कि पटना की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कमला आचार्य ने रोहिणी का जन्म कराया था। लालू यादव ने डॉक्टर को फीस देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बदले में उन्होंने सिर्फ एक अनुरोध किया—नवजात बच्ची को मेरा उपनाम दे दीजिए। लालू यादव ने यह आग्रह स्वीकार कर लिया, और इस तरह रोहिणी "आचार्य" बनीं।

अपनी हालिया पोस्ट में रोहिणी ने लिखा कि वे राजनीति छोड़ रही हैं और परिवार से दूरी बना रही हैं। उनका कहना है कि उन्हें यह कदम संजय यादव और रमीज़ के कहने पर उठाना पड़ा और वे इसका पूरा दोष खुद ले रही हैं।

एमबीबीएस करने के बाद रोहिणी ने 2002 में समरेश सिंह से शादी की, जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। दोनों पहले अमेरिका गए और फिर सिंगापुर चले गए, जहां वे आज अपने दो बच्चों के साथ रहते हैं।

रोहिणी आचार्य का यह फैसला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के लिए बड़ा संकेत है कि लालू परिवार के भीतर की खाई अब गहरी हो चुकी है।

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