सिवान के किसान ने किया कमाल, कश्मीरी सेब से लेकर 15 से ज्यादा विदेशी फलों का उत्पादन बिहार की मिट्टी में...

सिवान के भगवानपुर हाट प्रखंड के रहने वाले अरुण कुमार ने लगातार मेहनत और नए प्रयोग कर बागवानी कर कई नए कीर्तिमान स्थापित कर लिए है। उन्होंने लगभग 25 साल पहले नाशपाती की खेती शुरु की थी। आज वो अपने बगीचे में सेब, एवोकाडो, अंजीर, स्ट्रॉबेरी, चेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसे विदेशी फलों की खेती कर रहे हैं।

Jun 10, 2026 - 09:59
Jun 10, 2026 - 10:02
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सिवान के किसान ने किया कमाल, कश्मीरी सेब से लेकर 15 से ज्यादा विदेशी फलों का उत्पादन बिहार की मिट्टी में...

आम तौर पर बिहार की मिट्टी और जलवायु में जहा पारंपरिक खेती को ही सुरक्षित और सफल माना जाता है, वहीं सिवान के एक किसान ने कमाल कर दिया है। उन्होंने अपने बगीचे में कश्मीरी सेब से लेकर 15 से ज्यादा विदेशी फलों को उगा कर एक नया उदाहरण पेश किया है। उनका बाग आज आसपास के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। 

सिवान के भगवानपुर हाट प्रखंड के रहने वाले अरुण कुमार ने लगातार मेहनत और नए प्रयोग कर बागवानी कर कई नए कीर्तिमान स्थापित कर लिए है। उन्होंने लगभग 25 साल पहले नाशपाती की खेती शुरु की थी। आज वो अपने बगीचे में सेब, एवोकाडो, अंजीर, स्ट्रॉबेरी, चेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसे विदेशी फलों की खेती कर रहे हैं। अरुण कुमार का नाम बड़े प्रतिष्ठा के साथ एक प्रगतिशील किसान के तौर पर लिया जाने लगा है। 

उनके बगीचे में जब लोग पहुंचते हैं और यहां सेब, नाशपाती, स्टार फ्रूट, ड्रैगन फ्रूट और व्हाइट एपल जैसे विदेशी फलों को उगा हुआ देखते हैं तो आश्चर्य में पड़ जाते हैं। बड़ी बात यह है कि इन फलों को बिहार की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल नहीं माना जाता है, इसके बावजूद अरुण कुमार की प्रयोगधर्मिता और वैज्ञानिक तौर तरीकों के इस्तेमाल ने ऐसा संभव कर दिखाया है। 

अरुण कुमार को नए प्रकार के बागवानी का शौक अपने पिता से मिला था। उनके पिता अनिरुद्ध कुमार एक शिक्षक के साथ साथ बागवानी के बेहद शौकीन थें। अरुण कुमार ने अपने पिता की विरासत में नया अध्याय जोड़ दिया है। उनका दो एकड़ का बगीचा विविधता का उदाहरण बन चुका है। 
अरुण कुमार की बागवानी के प्रति प्रतिबद्धता इस तरह से भी समझा जा सकता है कि उनके बेटे सत्यम देव ने एग्रीकल्चर से एमएससी की पढ़ाई की है। अरुण कुमार के बगीचे में नाशपाती की कई किस्मों के साथ ही स्टार फ्रूट, बाबूगोशा, चेरी, हरमन 99, माल्टा, अन्ना सेब, लाल आंवला, स्ट्रॉबेरी, पीला और गुलाबी ड्रैगन फू्रट, अंजीर, आलूबुखारा, थाई एपल, एवोकाडो, कश्मीरी थाई एपल की फसलें और उनमें उगे हुए फल दिखाई पड़ते हैं। 

अरुण कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पास पांच नाशपाती के पेड़ हैं जिनसे वो हर साल दो से चार क्विंटल तक फसल उत्पादन कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ फसल उत्पादन नहीं बल्कि किसानों को नई खेती के लिए प्रेरित करना है। 

वो कहते हैं कि यदि वैज्ञानिक तकनीक अपना कर सही जानकारी और धैर्य के साथ काम किया जाए तो बिहार की मिट्टी में कई नई फसलों की खेती संभव है जो किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी। अरुण कुमार सिंह का बगीचा आज बिहार के किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। यहां प्रकृति, प्रयोग और परिश्रम का पुरस्कार स्पष्ट देखने को मिल रहा है।  

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SIMRANJEET SINGH Diploma in media studies ( Ranchi ),8 years experience in news media, Political Expert Chief editor in Bihar News