बेटा एमएलसी नहीं बनने के दुख के बीच उपेंद्र कुशवाहा ने दी लालू प्रसाद यादव को जन्मदिन की बधाई...... निकाले जा रहे राजनीतिक मायने
वैसे आखिरी में आपको बता दें कि चिराग पासवान ने भी लालू प्रसाद यादव को जन्मदिन की बधाई दी है। मिला जुलाकर लालू प्रसाद यादव के 79 वें जन्मदिन ने बिहार की राजनीति में 79 प्रकार की संभावनाओं को हवा दे दी है।
राष्ट्रीय लोक मोरचा के प्रमुख राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को उनके 79वें जन्मदिन की बधाई दी। बीते दिनों बिहार में विधान परिषद की 10 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित हुए, उनमें उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का नाम नहीं था। जाहिर तौर पर एक पिता के रुप में उपेंद्र कुशवाहा को अपने बेटे का नाम नहीं होने का दुख जरुर होगा क्योंकि हर कोई यह मान कर बैठा था कि दीपक प्रकाश का एमएलसी बनना तय है क्योंकि वो बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और पंचायती राज जैसा महत्वपूर्ण विभाग उनके पास है। हालांकि सार्वजनिक रुप से कभी उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पीड़ा का इजहार नहीं किया है।
इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन आ गया। गुरुवार को उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया के जरिए राजद सुप्रीमो को जन्मदिन की बधाई दी। उपेंद्र कुशवाहा ने बाकायदा ग्राफिक्स डालकर और लालू प्रसाद यादव को टैग कर जन्मदिन की बधाई दी। उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करते हैं। उपेंद्र कुशवाहा का यह पोस्ट फेसबुक और एक्स पर दिखाई पड़ा।
अब उपेंद्र कुशवाहा के इस पोस्ट के कई राजनीतिक मायने निकाले जाने लगें। हालांकि लालू प्रसाद यादव को जन्मदिन की बधाई तो सीएम सम्राट चौधरी ने भी दी। सम्राट चौधरी ने एक्स के जरिए लालू प्रसाद यादव को बधाई देते हुए लिखा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। प्रभु से आपके स्वस्थ, दीर्घ एवं यशस्वी जीवन की मंगलकामना करता हूं। सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री हैं, और लालू प्रसाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इसे सामान्य शिष्टाचार के रुप में देखा जा रहा है लेकिन उपेंद्र कुशवाहा के पोस्ट को कुछ लोगों ने संभावनाओं का खेल बता दिया।
मजेदार बात तो यह रही कि उपेेंद्र कुशवाहा के पोस्ट पर कोयरी कुर्मी समाज के लोगों ने भी खुले दिल से लालू प्रसाद यादव को जन्मदिन की बधाई दी और सामाजिक न्याय के योद्धा के रुप में उनके योगदान की प्रशंसा की। कुछ लोगों ने यहां तक लिख दिया कि लालू प्रसाद यादव किसी राजनीतिक दल से उपर हैं और वो व्यक्ति नहीं बल्कि विचारधारा है।
दरअसल जब तक सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री नहीं थें, तब तक उपेंद्र कुशवाहा को कुशवाहा समाज का एकछत्र नेता माना जाता था लेकिन सम्राट चौधरी के सीएम बनने के बाद कुछ ताकतें जानबूझ कर उन्हें कमतर दिखाने का प्रयास करती हैं। सच्चाई यह भी है कि आज सम्राट चौधरी अगर बिहार के मुख्यमंत्री हैं तो इसके पीछे उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति और संघर्ष है। उपेंद्र कुशवाहा जैसे जनाधार वाले नेता को लोकसभा की सिर्फ एक सीट दी गई औ वहां भी वो तीसरे स्थान पर चले गए। काराकाट लोकसभा क्षेत्र में एनडीए का पूरा वोटर पवन सिंह के साथ चला गया और उपेंद्र कुशवाहा को वहां जो कुछ भी वोट हासिल हुआ, वो उनके खुद की बदौलत हासिल हुआ।
उपेंद्र कुशवाहा बिहार की राजनीति का वो शेर है जिसे किसी पिंजरे में बांध कर नहीं रखा जा सकता है। उपेंद्र कुशवाहा अपने दम पर राजनीति करते हैं। वो आज भी कुशवाहा समाज के सबसे मजबूत नेता हैं। सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री तभी तक हैं जब तक भाजपा हाईकमान का आर्शीवाद उनके साथ है,
वैसे भी बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा व्यक्तिगत रुप से आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव का काफी सम्मान करते हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने आरजेडी को कभी भी अछूत नहीं माना है। उपेद्र कुशवाहा का भी आरजेडी काफी सम्मान करती है। जिस उपेंद्र कुशवाहा को भाजपा ने सिर्फ एक लोकसभा सीट के लायक समझती है, उन्हीें उपेंद्र कुशवाहा को लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव पांच लोकसभा सीट गठबंधन में चुनाव लड़ने के लिए देती है।
2019 के लोकसभा चुनाव को याद कर लीजिए। उपेंद्र कुशवाहा नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रिमंडल से बाहर आ गए थें। उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। आरजेडी ने उपेंद्र कुशवाहा को पांच लोकसभा की सीटें दी। उपेंद्र कुशवाहा ने खुद दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ा। काराकाट और उजियारपुर से स्वयं उपेंद्र कुशवाहा उम्मीदवार थें। इसके अलावा जमुई, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण सीट भी आरजेडी ने उपंेद्र कुशवाहा को दिया। माहौल उस समय विपरीत था, कोई उम्मीदवार उस वक्त जीत नहीं सका। तब उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का नाम राष्ट्रीय लोक समता पार्टी हुआ करता था।
उपेंद्र कुशवाहा बिल्कुल नीतीश कुमार की तरह राजनीति करते हैं। वो किसी भी गठबंधन या पार्टी को अछूत नहीं मानते हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी नया राजनीतिक प्रयोग किया। वो मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी और ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ तीसरा मोरचा बनाकर मैदान में उतर गए। इस तीसरे मोरचे को वैसे तो सिर्फ छह सीटें मिली लेकिन लगभग हर सीट पर इनके उम्मीदवारों को सम्मानजनक वोेटें मिली। उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति को देखें तो इनमें सिर्फ एक ही कमी है कि ये संघर्ष नहीं कर पातें हैं। जैसा संघर्ष केंद्रीय राजनीति में अभी राहुल गांधी और बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव कर रहे हैं। अगर उपेंद्र कुशवाहा में संघर्ष का माद्दा होता तो शायद वो और बड़े नेता होते।
बात अगर कुशवाहा पॉलिटिक्स की करें तो एक बात जान लेना चाहिए कि सम्राट चौधरी के साथ जो जनाधार है वो सिर्फ उनके मुख्यमंत्री रहने तक है लेकिन उपेंद्र कुशवाहा के पास जो ताकत है, वो बिना किसी पॉवर, कुर्सी या सत्ता के लिए है।
खैर, हम यह बात स्पष्ट रुप से जानते हैं कि कोई भी राजनेता दूसरे राजनेता को अगर सार्वजनिक रुप से जन्मदिन की बधाई दे रहा है तो उसके कई मायने निकाले जाते हैं और निकाले जाने भी चाहिए क्योंकि नेता अगर पब्लिक के बीच में पानी भी पीता है तो बहुत सोच समझ कर और भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर। वैसे आखिरी में आपको बता दें कि चिराग पासवान ने भी लालू प्रसाद यादव को जन्मदिन की बधाई दी है। मिला जुलाकर लालू प्रसाद यादव के 79 वें जन्मदिन ने बिहार की राजनीति में 79 प्रकार की संभावनाओं को हवा दे दी है।
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