भरत तिवारी की हत्या या एनकाउंटर, पूर्व DGP का बड़ा बयान
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने राज्य सरकार की कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि सिर्फ 04 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर देने से इंसाफ नहीं होगा।
Bharat Tiwari Encounter मामले पर बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व DGP ने सोशल मीडिया पर Live आकर अपना पक्ष सामने रखा और इस मामले पर पुलिस के साथ ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
उन्होंने बेहद कड़े तेवर में अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला किसी पुलिस मुठभेड़ का नहीं बल्कि सीधे सीधे हत्या का लगता है। भरत तिवारी के बैकग्राउंड की चर्चा करते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि वो कोई चोर, लुटेरा, डाकू, नक्सली या आतंकी नहीं था। वो साइंस ग्रेजुएट युवक था जो गांव के बाढ़ पीड़ितों और विस्थापितों की आवाज़ उठाता था।
गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि वो सिस्टम और प्रशासन से लड़ता लड़ता हताशा में मानसिक रूप से थोड़ा असंतुलित और दीवाना हो गया था। पुलिस और सिस्टम को गाली देने वाला इतना बड़ा अपराधी तो नहीं हो जाता कि किसी को गोली ही मार दी जाए।
वीडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि साफ दिख रहा है कि भरत और पुलिस फोर्स के बीच की दूरी 200 मीटर से ज्यादा थी। एक साधारण पिस्तौल की मारक क्षमता 30 मीटर तक होती है। अत्याधुनिक हथियारों से लैस पुलिस बल को उससे कोई खतरा नहीं था। वो अपना हथियार फेंक चुका था और सरेंडर कर चुका था। ऐसी स्थिति में एक निहत्थे पर पुलिस द्वारा गोलियां बरसाना पुलिस की ' कार्यप्रणाली ' पर दाग़ लगाता है।
वहीं पुलिस द्वारा जारी विज्ञप्ति में उसे विक्षिप्त बताने पर पूर्व डीजीपी ने कहा कि अगर वो मानसिक रूप से असंतुलित था तो पुलिस को यह बताना होगा कि उसका इलाज कहां चल रहा था ! वहीं दोषी पुलिसकर्मियों पर अपनी बात कहते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ चार पुलिस वालों को सस्पेंड कर देना काफी नहीं है। जब सरकार कहती है कि कोई भी अपराधी बख्शा नहीं जाएगा तो यह नियम वर्दी वाले अपराधियों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए। गुप्तेश्वर पांडेय ने घटना में शामिल पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने और नौकरी से बर्खास्त करने की मांग की।
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