आरक्षण पर बिहार में राजनीति तेज, चिराग और उपेंद्र ने लिया जोरदार स्टैंड
उधर एनडीए के सहयोगी दलों ने साफ तौर पर कह दिया है कि आरक्षण से छेड़छाड़ तो दूर समीक्षा की बात भी नहीं होनी चाहिए। खास तौर पर लोजपा रामविलास के प्रमुख चिराग पासवान और रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बयानों ने आरक्षण पर बहस को और भी तेज कर दिया है।
केंद्र की नरेेंद्र मोदी सरकार मुश्किलों का सामना कर रही है। देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर 21 और 22 अगस्त को सवर्ण समाज के नौजवानों ने आरक्षण और यूजीसी एक्ट के मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया। ये सभी भाजपा और एनडीए के कट्टर समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में सवर्ण समाज और सामान्य वर्ग के इस प्रदर्शन से केंद्र सरकार और भाजपा की मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई पड़ रहीं हैं।
उधर एनडीए के सहयोगी दलों ने साफ तौर पर कह दिया है कि आरक्षण से छेड़छाड़ तो दूर समीक्षा की बात भी नहीं होनी चाहिए। खास तौर पर लोजपा रामविलास के प्रमुख चिराग पासवान और रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बयानों ने आरक्षण पर बहस को और भी तेज कर दिया है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा है कि आरक्षण खैरात नहीं है बल्कि संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि उनकी और उनकी पार्टी लोजपा रामविलास की स्पष्ट सोच है कि आरक्षण को समाप्त करने की बात करनी तो दूर, आरक्षण की समीक्षा की बात भी उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
चिराग पासवान सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता को अटूट बताया है। चिराग पासवान के इस बयान पर उनके सवर्ण समर्थकों में निराशा देखी जा रही है। उधर पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने आरक्षण बढ़ाने की वकालत की है।
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार में काफी सोच समझ कर जातिगत जनगणना कराया था। इन आंकड़ों के आधार पर बिहार में ओबीसी आरक्षण की सीमा को 65 फीसदी तक बढ़ाया गया था लेकिन यह मामला कोर्ट में जाकर रुक गया था लेकिन अब नीतीश कुमार के कामों को आगे बढ़ाने की जरुरत है। कुशवाहा के बयानों से साफ है कि वो आरक्षण को बढ़ाने के समर्थन में हैं।
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