बिहार सिपाही परीक्षा: गोल्डन गैंग का सनसनीखेज खुलासा, ट्रेनिंग के बाद हाइटेक चीटिंग !
समर सिंह उर्फ गोल्डन मूल रुप से आरा का रहने वाला है। उसके गिरोह में कई रिटायर्ड अफसर, डीएसपी और इंस्पेक्टर शामिल हैं जो संगठित रुप से दक्ष सॉल्वर उसे मुहैया कराते थें।
सिपाही भर्ती परीक्षा में पास कराने की सेंटिंग करने वाले सॉल्वर गिरोह से जुड़े कुंदन उर्फ देव सर और देव कुमार को तो इस गोरखधंधे के छोटे खिलाड़ी हैं। असली खिलाड़ी तो इस गिरोह का सरगना समर सिंह उर्फ गोल्डन है। वो आरा, मुंगेर, सहरसा और खगड़िया मे ंरहकर गिरोह का संचालन करता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद कई सनसनीखेज तथ्यों का खुलासा होने वाला है।
समर सिंह उर्फ गोल्डन मूल रुप से आरा का रहने वाला है। उसके गिरोह में कई रिटायर्ड अफसर, डीएसपी और इंस्पेक्टर शामिल हैं जो संगठित रुप से दक्ष सॉल्वर उसे मुहैया कराते थें।
इसी गिरोह के सदस्य अभिषेक और गौतम अभ्यर्थियों को रिसीवर डिवाइस लगाने की ट्रेनिंग दिया करते थें। इन्हें एक सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाती थी। इस रिसीवर डिवाइस को बनियान में छाती के पास लगाने और इयरपीस के सहारे एग्जाम सेंटर के बाहद वॉकी टॉकी से लैस गिरोह के सदस्य उन्हें उत्तर बताएं तो उनका सहयोग लेकर जब उत्तर दें तो वीक्षक को थोड़ा भी शक न हो, इसकी बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती थी।
रिसीवर डिवाइस लगाने, सवालों के जवाब सुनने की तन्मयता पर मंथन करते और पूरी तरह विश्वास के योग्य बनाने का काम गिरोह के सदस्य करते हैं। भागलपुर के जीरोमाइल, हबीबपुर और बरारी के बड़ी खंजरपुर में इस गिरोह ने बाकायदा ट्रेनिंग सेंटर खोल रखा था।
सहरसा के सौर बाजार निवासी मिलिट्री एकेडमी स्कूल के डायरेक्टर दिलीप कुमार की भी पुलिस तलाश कर रही है। इस मामले में वो भी नामजद अभियुक्त बनाए गए हैं। पुलिस टीम को आरोपियों के बीच होने वाली बातचीत, चैट और परीक्षा में अभ्यर्थी उपलब्ध कराने को लेकर दिलीप की भूमिका भी पाई गई है। दिलीप के मोबाइल नंबर की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
परीक्षा पास कराने के एवज में यह गिरोह एक अभ्यर्थी से आठ लाख रुपये की वसूली करता था। जैसे ही अभ्यर्थी पैसा देते हैं, वैसे ही गिरोह का सरगना अभ्यर्थी संबंधित जिले के ट्रेनिंग सेंटर पर बुलाकर रिसीवर डिवाइस लगाने और उसके इस्तेमाल की ट्रेनिंग दिया करते थें।
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