बिहार का कुशवाहा समाज गुस्से में, बांकीपुर उपचुनाव में कहीं खेल न हो जाए....
08 जून को बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन का आखिरी दिन था। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोरचा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश एमएलसी नहीं बन सकें।
कहते हैं कि चीते की चाल और कुशवाहा के प्लान को सब नहीं समझ सकतें। बिहार का कुशवाहा चीते क चाल में धीरे धीरे कदम बढ़ाता है और धीरे धीरे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच जाता है। एक बार फिर से भाजपा और कुशवाहा समाज के बीच टशन देखने को मिल रही है। मामला बिहार विधान परिषद चुनाव का है।
08 जून को बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन का आखिरी दिन था। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोरचा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश एमएलसी नहीं बन सकें। उपेंद्र कुशवाहा की किस्मत में न जाने कितना संघर्ष लिखा हुआ है। लालू प्रसाद यादव के बेटे राजनीति में सेट हो गए। नीतीश कुमार और रामविलास पासवान का बेटा सेट हो गया। सिर्फ एक उपेंद्र कुशवाहा के बेटे के साथ धोखा कर दिया गया। दीपक प्रकाश में क्या कमी है जो उनको भाजपा ने एमएलसी नहीं बनाया !
उपेंद्र कुशवाहा भले ही इस मसले पर सीधे तौर पर कुछ बोलने या किसी को जिम्मेदार ठहराने से बच रहे हो लेकिन बिहार का कुशवाहा समाज इसे लेकर भाजपा से पूरी तरह से नाराज दिख रहा है। कुशवाहा समाज का गुस्सा सीधे तौर पर सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहा है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सीधे भाजपा को टारगेट किया जा रहा है। माना जाता है कि बांकीपुर विधानसभा सीट पर कुशवाहा समाज की बड़ी आबादी है। बिहार में कुशवाहा समाज की आबादी लगभग 5 प्रतिशत है। ऐसे में अगर कुशवाहा समाज ने भाजपा से बदला लेने की रणनीति अपनाई तो भाजपा को लेने के देने पड़ सकते हैं।
एक अनुमान के अनुसार बांकीपुर विधानसभा सीट पर लगभग 30 हजार कुशवाहा आबादी है। यह आंकड़ा किसी भी सीट पर चुनाव को प्रभावित करने के लिए काफी होता है। वैसे भी कुशवाहा समाज राजनीतिक रुप से जागरुक, प्रगतिशील और एग्रेसिव होता है। वैसे बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। भाजपा को लगता है कि कोई भी शक्ति उसे हरा नहीं सकती है।
चूंकि बांकीपुर विधानसभा सीट पर बिहार की पहली भाजपा सरकार का लिटमस टेस्ट होना है, फिर भी भाजपा बांकीपुर में जीत को लेकर निश्चिंत है। यही वजह है कि उसने बिहार में कुशवाहा समाज के सबसे बड़े नेता उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी नहीं बनने दिया।
कई लोग यह सवाल पूछ सकते हैं कि भाजपा ने तो कुशवाहा नेता सम्राट चौधरी को सीएम बनाया हुआ है, इसके बाद भी कुशवाहा समाज भाजपा के खिलाफ क्यों जाएगा ? तो इसका जवाब यह है कि आज सम्राट चौधरी हैं लेकिन कल नहीं रहेंगे। जब तक पार्टी आलाकमान चाहेगा तब तक सम्राट चौधरी सीएम रहेंगे लेकिन कुशवाहा समाज की पार्टी तो राष्ट्रीय लोक मोरचा ही रहेगी और समाज के नेता उपेंद्र कुशवाहा ही रहेंगे।
अब कई लोग कह रहे हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जब खुद कुशवाहा समाज से हैं तो क्या सभी पद कुशवाहा समाज को ही चाहिए। तो इसका भी जवाब सुन लीजिए....
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्य समुदाय से आते हैं इसके बावजूद गृह मंत्री अमित शाह भी वैश्य समाज से ही हैं। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भी वैश्य समाज से ही हैं। पीयूष गोयल भी वैश्य समाज से हैं। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता भी वैश्य समाज से हैं। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी भी वैश्य समाज से हैं। कई बड़े पदों पर भाजपा ने वैश्य समाज के लोगों को बैठा रखा है तो बिहार में कुशवाहा सीएम होने की वजह से बाकी के पदों पर कुशवाह नहीं रह सकते हैं क्या ! कुशवाहा समाज के नौजवान और बुद्धिजीवी यह सवाल सोशल मीडिया के माध्यम से पूछ रहे हैं।
यह नहीं भूला जा सकता है कि बिहार में जो पिछले विधानसभा चुनाव मंे एनडीए को जो प्रचंड जनादेश मिला, उसमें सबसे बड़ी भूमिका कुशवाहा समाज की है। कुशवाहा समाज मूल रुप से किसान वर्ग से आता है। उसे पौधा लगाना और उगाना आता है तो जड़ खोदना भी वो अच्छे से जानता है।
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