भाजपा ने क्यों किया उपेंद्र कुशवाहा का अपमान, किसके इशारे पर हुआ खेल, अब बेटे को देना ही होगा इस्तीफा, आगे क्या करेंगे कुशवाहा
सवाल सबसे बड़ा है कि उपेंद्र कुशवाहा के साथ यह खेल किसने खेला है। इतनी बड़ी साजिश उपेंद्र कुशवाहा के साथ हो गई और इसकी भनक किसी को नहीं लगी। आगे क्या करेंगे उपेंद्र कुशवाहा, यह अब सबसे बड़ा सवाल है।
आखिरकार उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को भाजपा ने एमएलसी नहीं बनने दिया। अब जब दीपक प्रकाश एमएलसी नहीं होंगे तो जाहिर तौर पर मंत्री भी नहीं रह पाएंगे। वो वर्तमान में सम्राट चौधरी की सरकार में पंचायती राज विभाग की कमान संभाल रहे हैं।
उपेंद्र कुशवाहा संभवतः बिहार के ऐेसे पहले नेता होंगे जिन्होंने खूब पार्टियां बदली, बनाई और ढेर सारे गठबंधनों का हिस्सा बनें। आज उनके साथ बहुत बड़ा गेम हो गया है। यह गेम उनके साथ भाजपा ने खेला है। पर सवाल सबसे बड़ा है कि उपेंद्र कुशवाहा के साथ यह खेल किसने खेला है। इतनी बड़ी साजिश उपेंद्र कुशवाहा के साथ हो गई और इसकी भनक किसी को नहीं लगी। आगे क्या करेंगे उपेंद्र कुशवाहा, यह अब सबसे बड़ा सवाल है।
सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। उपेंद्र कुशवाहा को भाजपा ने राज्यसभा भेज दिया। भाजपा की मदद से पत्नी स्नेहलता सासाराम से विधायक हो गईं। बेटा दीपक प्रकाश बिहार सरकार में मंत्री बन गया। बिना किसी सदन का सदस्य बनें दो दो बार शपथ ग्रहण हो गया। बिहार की आम जनता में इस बात को लेकर काफी गुस्सा दिख रहा था। आरजेडी और कांग्रेस को पानी पी पीकर कोसने वाली भाजपा और एनडीए ने परिवारवाद का इतना गंदा खेल खेला कि आरजेडी और लालू परिवार के परिवारवाद को भी इन्होंने पीछे छोड़ दिया।
उपेंद्र कुशवाहा के इस अति परिवारवाद की वजह से भाजपा भी शायद परेशान थी। इसमें कोई दो राय नहीं कि उपेंद्र कुशवाहा बिहार में कुशवाहा समाज के बड़े नेता हैं। सम्राट चौधरी को आज भाजपा ने सीएम बनाया है, हो सकता है कि कल को हटा दे। सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं इसलिए कुशवाहा समाज उनके साथ है लेकिन कल को वो मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे तो क्या होगा ! ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा ही कुशवाहा समाज के नेता हैं और राष्ट्रीय लोक मोरचा कुशवाहा समाज की अपनी पार्टी है, जैसे यादवों के लिए आरजेडी, पासवानों के लिए लोजपा और कुर्मियों के लिए जेडीयू है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उपेंद्र कुशवाहा पर उनकी पार्टी का विलय भाजपा में करने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने विलय करने से इंकार कर दिया। इसी के साथ यह भी सवाल उठता है कि भाजपा में विलय करने का ऑफर उन्हें किसने दिया था। जिसने यह ऑफर दिया होगा, संभवतः यह साजिश उसी ने किया होगा। जाहिर तौर पर उपेंद्र कुशवाहा उस शख्स को जानते होंगे।
उपेंद्र कुशवाहा के साथ जो हुआ है, वो किसी अपमान से कम नहीं है। भले ही वो उपर उपर कुछ न कहें लेकिन उनके अंदर जो चल रहा होगा, वो वही जानते होंगे। इकलौते बेटे का इस्तीफा देना किसी भी पिता को बर्दाश्त नहीं होगा। ऐसा उपेंद्र कुशवाहा के साथ पहली बार नहीं हुआ है। उनके साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट में भी यही हो चुका है। भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह निर्दलीय मैदान में उतर गए और उपेंद्र कुशवाहा तीसरे नंबर पर चले गए। एनडीए के समर्थक उपेंद्र कुशवाहा की बजाय पवन सिंह के साथ काम करते दिखाई पड़ें। आज उन्हींे पवन सिंह को भाजपा ने एमएमलसी बना दिया और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को छांट दिया।
उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी जिस दिन से विधायक बनीं और उसके कुछ ही दिनों के बाद जैसे ही उनके बेटे मंत्री बनें थें, उसने जलने वालों की संख्या निरंतर बढ़ने लगी थी। पार्टी और गठबंधन के भीतर ही उनके पर कतरने की तैयारी शुरु हो गई थी। किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि दीपक प्रकाश एमएलसी नहीं बनेंगे। सब यह मानकर चल रहे थें कि उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार के बेटे एमएलसी बनेंगे लेकिन उपेंद्र कुशवाहा के साथ गेम हो गया। निश्चित रुप से अब उपेंद्र कुशवाहा आगे की रणनीति और भविष्य की राजनीति पर मंथन कर रहे होंगे लेकिन समस्या यह है कि उपेंद्र कुशवाहा संघर्ष नहीं कर सकतें और विपक्ष में रह नहीं सकतें। ऐसे में मन मारकर वो भाजपा में ही बने रहेंगे।
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