नीतीश कुमार के बेटे की खुली पोल तो मचा सियासी हड़कंप, राजद समर्थक ले रहें चुटकी
दरअसल हुआ ये कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी भी चुनाव में नामांकन दाखिल करते समय हलफनामा दिया जाता है। इसमें उम्मीदवार का अपना पूरा डिटेल देना पड़ता है। खास तौर पर शैक्षणिक योग्यता, संपत्ति का विवरण और अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का विवरण देना पड़ता है। इस हलफनामे पर मीडिया, जनता, विपक्ष सबकी नजर रहती है।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार इंजीनियर नहीं हैं। ये खुलासा होते ही बिहार की राजनीति में हड़कंप देखा जा रहा है। विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव की डिग्री पर हमला बोलने वाले अभी खामोश हैं, जब से यह पता लगा है कि निशांत कुमार ने अपनी पढ़ाई पूरी ही नहीं की है। निशांत कुमार फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री हैं और स्वास्थ्य जैसा महत्वपूर्ण विभाग वो देख रहे हैं। निशांत कुमार के कंधे पर बिहार की 14 करोड़ आबादी के स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी है। एक महीने से ज्यादा का वक्त निकल गया है लेकिन स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार स्वास्थ्य विभाग के लिए कुछ खास नहीं कर पाए हैं। इसकी वजह से वो विरोधियों के निशाने पर हैं और उधर जैसे ही उनकी डिग्री का सच सामने आया तो विरोधियों का हमला और तेज हो गया है।
दरअसल हुआ ये कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी भी चुनाव में नामांकन दाखिल करते समय हलफनामा दिया जाता है। इसमें उम्मीदवार का अपना पूरा डिटेल देना पड़ता है। खास तौर पर शैक्षणिक योग्यता, संपत्ति का विवरण और अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का विवरण देना पड़ता है। इस हलफनामे पर मीडिया, जनता, विपक्ष सबकी नजर रहती है।
निशांत कुमार अपने पिता नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से एमएलसी चुनाव के प्रत्याशी हैं। उन्होंने अपने नामांकन के दौरान सारा डिटेल दिया। इसमें उनके शैक्षणिक योग्यता का पूरा डिटेल दिया जिसमें पता चला कि वो इंजीनियर नहीं हैं। जबकि पूरा बिहार अब तक निशांत कुमार को इंजीनियर समझता था। नीतीश कुमार की पार्टी के बड़े बड़े नेता होर्डिंग्स,बैनर और पोस्टर लगाकर बड़े गर्व से बताया करते थें कि तेजस्वी यादव नौंवी पास हैं और निशांत कुमार इंजीनियर हैं लेकिन चुनावी दस्तावेजों से अब बिल्कुल साफ हो गया है कि निशांत कुमार ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी ही नहीं की है। जेडीयू नेताओं के दावे झूठ साबित हुए हैं।
हलफनामे के अनुसार निशांत कुमार ने वर्ष 1998 में पटना साइंस कॉलेज से इंटर की पढ़ाई पूरी की है। इसके बाद उनका एडमिशन बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी यानी बीआईटी मेसरा में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग कंप्यूटर साइंस में हुआ। यह पूरी डिग्री 8 सेमेस्टर में कंप्लीट होती है लेकिन उन्होंने सिर्फ 5 सेमेस्टर की पढ़ाई ही पूरी की। 2001 में उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी छोड़ दी थी। लंबे समय तक बिहार की पब्लिक के बीच यह धारणा बनाई गई कि निशांत कुमार इंजीनियर हैं। इस चुनावी हलफनामे ने इस भ्रम को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
पढ़ाई तो पढ़ाई, निशांत कुमार की संपत्ति भी खासी चर्चाओं में है। निशांत कुमार के हाथ में सिर्फ 17 हजार 409 रुपये नकद है लेकिन बाकी जगहों पर उनके पास करोड़ों की संपत्ति है। निशांत ने ये संपत्ति बैंकों में जमा और निवेश के जरिए बनाई है।
बोरिंग रोड, पटना के भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में निशांत कुमार के नाम से 72 लाख 22 हजार रुपये का फिक्स डिपॉजिट है जबकि भारतीय स्टेट बैंक की ही सचिवालय शाखा में 48 लाख 87 हजार रुपये का पीपीएफ जमा है। वहीं बात करें निशांत कुमार के म्यूचुअल फंड की तो इसमें 11 लाख रुपये से ज्यादा और पोस्ट ऑफिस में 34 लाख 35 हजार रुपये का निवेश भी उनके नाम पर शामिल है।
अगर वाहनों की बात कर लें तो निशांत कुमार के पास दो वाहन हैं। इनमें एक 2016 मॉडल की हुंडई ग्रैंड आई 10 और दूसरी 2026 मॉडल की किया सेल्टॉस शामिल है। एक खास बात यह है कि निशांत कुमार के पास किसी भी प्रकार की कोई ज्वेलरी नहीं है।
निशांत कुमार की अचल संपत्ति की बात करें तो उनके पास पैतृक गांव में कृषि भूमि है। इसके साथ ही पटना के शेखपुर स्थिति शिव राधिका कॉम्प्लेक्स में एक फ्लैट और पीसी हाउसिंग सोसायटी, कंकड़बाग में जमीन भी उनके नाम पर दर्ज है।
चुनाव लड़ने के समय नामांकन के दौरान हलफनामा हर प्रत्याशी को देना पड़ता है। निशांत कुमार को भी एमएलसी चुनाव लड़ने के समय हलफनामा देना पड़ा लेकिन इस हलफनामे में अच्छी खासी सुर्खियां देश भर में बंटोर ली है, खास तौर उनकी अधूरी पढ़ाई को लेकर और यह सच सामने आने को लेकर कि निशांत कुमार इंजीनियर हैं ही नहीं हैं। जेडीयू नेताओं का यह ढोल फट गया है। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर आरजेडी समर्थक खूब मजा लेते हुए दिखाई दे रहे हैं।
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