बिहार में जमीन की मापी हुई महंगी, सरकार ने जारी की नई रेट लिस्ट

मिली जानकारी के अनुसार एक आवेदन पर अधिकतक 4000 रुपये शुल्क ही लिए जाएंगे। नगर निकायों में भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये तथा अधिकतम 8000 रुपये शुल्क निर्धारित किए गए हैं।

Jun 11, 2026 - 07:49
Jun 11, 2026 - 07:52
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बिहार में जमीन की मापी हुई महंगी, सरकार ने जारी की नई रेट लिस्ट

चौतरफा महंगाई की मार के बीच अब बिहार में जमीन की मापी भी महंगी कर दी गई है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने रैयती जमीन की मापी शुल्क में वृद्धि का फैसला किया है। विभाग ने नए मापी शुल्क निर्धारित कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा 1000 रुपये शुल्क अदा करना होगा। 

मिली जानकारी के अनुसार एक आवेदन पर अधिकतक 4000 रुपये शुल्क ही लिए जाएंगे। नगर निकायों में भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये तथा अधिकतम 8000 रुपये शुल्क निर्धारित किए गए हैं। 

इसके साथ ही सरकार ने तत्काल मापी की सुविधा के लिए अलग से शुल्क निर्धारित किया है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए 4000रु प्रति खेसरा एवं अधिकतम 16000रु शुल्क निर्धारित किया गया है। 

वर्तमान में बिहार काश्तकारी नियमावली 1885 के नियम 23 के तहत ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद अंचल कार्यालयों द्वारा सशुल्क भूमि की मापी की जाती है। लंबे समय से इसमें कोई बदलाव नहीं होने की वजह से क्रियान्वयन में दिक्कत आ रही थी। यही वजह रही कि समयानुसार जमीन मापी शुल्क में वृद्धि का फैसला लिया गया। 

राजस्व विभाग के एक अधिकारीर ने बताया कि नई शुल्क दरों को लागू करने का उद्देश्य मापी कार्य को पहले से ज्यादा व्यवस्थित, समयबद्ध और पारदर्शी बनाना है। विभाग ने भू धारियों से ऑनलाइन आवेदन के माध्यम को अपनाने की अपील की है। भू धारियों के बीच भी इस बात की चर्चा है कि नए शुल्क दरों के लागू होने से जमीनी विवाद के मामले तेजी से निपटाए जा सकते हैं, हालांकि कई लोग इसे आम रैयतो पर आर्थिक बोझ भी बात रहे हैं। 

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SIMRANJEET SINGH Diploma in media studies ( Ranchi ),8 years experience in news media, Political Expert Chief editor in Bihar News