तेजप्रताप की पार्टी के विलय की खबरें मार्केट में..... कितनी सच्चाई
तेजप्रताप यादव के स्वभाव को देखें तो वो थोड़े भावुक मिजाज के व्यक्ति हैं। उन्हें अपनी पार्टी जेजेडी यानी जनशक्ति जनता दल से बहुत लगाव और प्रेम है। लगता नहीं है कि वो अपनी बनाई हुई पार्टी को सिर्फ एमएलसी की एक सीट के लिए विलय करेंगे क्योंकि तेजप्रताप यादव को ऐसा लगता है कि बिहार में बड़ी संख्या में उनके चाहने वाले और समर्थक हैं।
पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव की पार्टी जेजेडी का विलय आरजेडी में हो सकता है। बिहार विधान परिषद के चुनाव को लेकर तरह तरह की खबरें मार्केट में चल रही हैं। पिछले कुछ दिनों से खबर आ रही थी कि तेजप्रताप यादव आरजेडी कोटे से एमएलसी बनेंगे लेकिन कहीं से भी कोई पुष्टि नहीं हो सकी। अब नई खबर चल रही है कि तेजप्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल यानी जेजेडी का विलय आरजेडी में होगा और फिर तेजप्रताप यादव आरजेडी के बैनर तले विधान परिषद जाएंगे।
राष्ट्रीय जनता दल की ओर से विधान परिषद चुनाव पर कोई सार्वजनिक सूचना मीडिया को नहीं दी गई है। बिहार में एमएलसी की 10 सीटों के लिए वोटिंग होनी है। इनमें से 01 सीट पर उपचुनाव होगा। इन 10 में से 09 सीटों पर एनडीए की जीत तय है। सब कुछ ठीक रहा तो दसवीं सीट महागठबंधन खेमे से आरजेडी की होगी।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी चाहती हैं कि उनके बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को आरजेडी एमएलसी उम्मीदवार बनाए लेकिन तेजस्वी खेमा इसके लिए तैयार नहीं है। दरअसल तेजस्वी खेमा तेजप्रताप यादव को गंभीरता से नहीं लेता है। उन्हें लगता है कि तेजप्रताप की हरकतें किसी भी राजनीतिक दल के लिए सही नहीं है।
लेकिन बच्चे चाहे जैसे भी हो, अपने माता पिता के प्रिय होते हैं। तेजप्रताप भी अपने माता पिता के लिए बड़े प्रिय हैं। ऐसे में न चाहते हुए भी तेजस्वी यादव को अपने माता पिता की इच्छा का सम्मान भी करना होगा। हर हाल में उन्हें तेजप्रताप यादव को एमएलसी चुनाव के लिए आगे करना होगा।
वैसे भी आरजेडी पूरे परिवार की पार्टी है। लालू प्रसाद यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पत्नी राबड़ी देवी विधान परिषद में विपक्ष की नेता हैं। बेटे तेजस्वी यादव पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। एक बहन मीसा भारती लोकसभा की सांसद हैं। जब लोकसभा हार जाती हैं तो राज्यसभा की सांसद हो जाती हैं। दूसरी बहन रोहिणी आचार्य भी लोकसभा का चुनाव लड़कर राजनीति मंे एंट्री कर ही चुकी हैं। तेजप्रताप यादव भी दो बार विधायक और मंत्री बन चुके है।
वैसे बिहार की तमाम राजनीतिक पार्टियों का यही हाल है। सारे नेताओं को अपने परिवार की चिंता रहती है और बिहार की जनता कूद कूद कर जाति के नाम पर वोट देती है और उसके बाद ट्रेन के जनरल डिब्बे में ठूंस ठूंस कर मजदूरी करने के लिए दूसरे राज्यों में जाती रहती है।
तेजप्रताप फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं तो उनके लिए भी जल्दी से जगह बनाना जरुरी है। इसके बाद रोहिणी आचार्य के लिए भी तो सोचना है।
तेजप्रताप यादव के स्वभाव को देखें तो वो थोड़े भावुक मिजाज के व्यक्ति हैं। उन्हें अपनी पार्टी जेजेडी यानी जनशक्ति जनता दल से बहुत लगाव और प्रेम है। लगता नहीं है कि वो अपनी बनाई हुई पार्टी को सिर्फ एमएलसी की एक सीट के लिए विलय करेंगे क्योंकि तेजप्रताप यादव को ऐसा लगता है कि बिहार में बड़ी संख्या में उनके चाहने वाले और समर्थक हैं। अगर वो अपनी पार्टी का आरजेडी में विलय करते हैं तो उनके समर्थकों में गहरी निराशा होगी लेकिन जनता की सेवा करने के लिए सदन में होना भी जरुरी है।
ऐसे में बिहार के स्थानीय पत्रकार संभावना व्यक्त कर रहे हैं कि तेजप्रताप यादव अपने दल का विलय आरजेडी में कर सकते हैं लेकिन अभी तक आरजेडी और जेजेडी दोनों तरफ से ही इसे लेकर कोई बयान सामने नहीं आ सका है। जब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिल जाती तब तक संभावना से ही काम चलाना होगा।
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