बिहार में कैदी बेचेंगे डीजल पेट्रोल, जेलों की जमीनों पर पेट्रोल पंप खोलने का प्रस्ताव.....
बता दें कि कारा विभाग ने पहले से ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ एमओयू यानी करार कर लिया है। सरकार से मंजूरी मिल जाने के बाद जेलों की खाली पड़ी जमीनों पर पेट्रोल पंप लगाने का काम शुरु हो जाएगा।
अब बिहार की जेलों में बंद कैदी पेट्रोल पंप चलाएंगे। बिहार सरकार के कारा विभाग ने इसे लेकर विस्तृत प्रारुप तैयार किया है। अलग अलग जेलों की खाली पड़ी जमीनों पर पेट्रोल पंप बनाए जाएंगे। इन पेट्रोल पंपों का संचालन उस जेल के बंद कैदियों के द्वारा किया जाएगा। गृह कारा विभाग ने ये प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेज दिया है।
वित्त विभाग के बाद इसकी मंजूरी विधि विभाग से ली जाएगी। राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह कार्यक्रम लागू हो जाएगा। इसके बाद विभाग विभिन्न पेट्रोलियम कंपनियों के साथ पेट्रोल पंप संचालन के लिए एमओयू करेगा। बता दें कि कारा विभाग ने पहले से ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ एमओयू यानी करार कर लिया है। सरकार से मंजूरी मिल जाने के बाद जेलों की खाली पड़ी जमीनों पर पेट्रोल पंप लगाने का काम शुरु हो जाएगा।
अब ऐसे में आपके मन में यह सवाल उठता होगा कि क्या सभी कैदियों को पेट्रोल पंप संचालन का दायित्व मिलेगा क्योंकि जेल में भी अलग अलग स्वभाव के कैदी बंद होते हैं। इनमें से कई बेहद खतरनाक और खूंखार भी होते हैं। मौका मिलते ही भाग भी सकते हैं।
तो आपको बता दें कि वैसे कैदी जो लंबे समय से जेल में सजा काट रहे हैं और सुधार प्रक्रिया में शामिल हैं, उन्हें ही इन पेट्रोल पंपों के संचालन का दायित्व सौंपा जाएगा। वैसे कैदी जो गंभीर अपराधों के दोषी या सजायाफ्ता हैं, जिन पर खूंखार अपराध के मामले चल रहे हैं या साबित हुए हैं, उन्हें इससे दूर रखा जाएगा।
जैसे कि बाकी के पेट्रोल पंपों पर दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री होती है, वैसे ही इन पेट्रोल पंपों पर भी पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री होगी। उसके लिए भी आगे योजना बनाई जा रही है। बता दें कि बिहार में 08 केंद्रीय कारागारों समेत कुल 59 जेल हैं जिनकी क्षमता 47,750 है जबकि इन जेलों में 61,981 कैदी बंद हैं। इसका मतलब हुआ कि बिहार की जेलों मंे क्षमता से 30 प्रतिशत कैदी ज्यादा बंद हैं।
इन जेलों में कई प्रकार के सुधार कार्यक्रम चल रहे हैं जिनमें योग,ध्यान, उद्यमिता विकास आदि शामिल है। जानकारी के अनुसार इन पेट्रोल पंपों की जिम्मेदारी संभालने वाले कैदियों को उनकी मेहनत के लिए पैसे दिए जाएंगे। यह राशि जेल मैनुअल के अनुसार ही दी जाएगी। वर्तमान में बिहार के जेलों में बंद कैदियों को विभिन्न प्रकार के उत्पादन कार्यों के लिए उनके कौशल के आधार पर रोजाना 147 रुपये से 397 रुपये तक का पारिश्रमिक मिलता है।
ये पारिश्रमिक चार श्रेणियों के आधार पर मिलता है। जैसे अकुशल श्रमिक को रोजना चार घंटे के काम के लिए 147 रुपये, अकुशल को 294 रुपये, अर्ध कुशल को 309 रुपये और कुशल कैदियों को 397 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है।
सरकार की मंजूरी मिलने के बाद यह योजना शुरु तो हो जाएगी लेकिन इसका भविष्य क्या होगा! इसकी सफलता और असफलता की गारंटी वक्त ही दे सकता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0