टेंडर घोटाले का मास्टरमाइंड रिशु श्री आएगा रिमांड पर, सात दिन की कस्टडी और सौ सवाल
बिहार में टेंडर घोटाले में गिरफ्तार रिशु श्री से एसवीयू ने पूछताछ की तैयारियां तेज कर दी गई है। निगरानी ने सात दिनों की रिमांड मांगी है। जांच एजेंसियों को इस दौरान कई अहम खुलासे की उम्मीद है।
बिहार में टेंडर घोटाले का मामला गर्म है। एसवीयू ने मास्टरमाइंड रिशु श्री से पूछताछ के लिए 100 सवालें की लिस्ट तैयार की है। कोर्ट से सात दिन की रिमांड मांगी गई है। एसवीयू कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रही है। फिलहाल कोर्ट से रिमांड की मंजूरी मिली है। संभावना जताई जा रही है कोर्ट एक दिनों में रिमांड पर निर्णय ले सकती है।
वहीं जांच एजेंसी को उम्मीद है कि रिमांड मिलने के बाद कई अहम खुलास हो सकते हैं। रिशु श्री फिलहाल पटना के बेउर जेल में बंद है। उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था लेकिन अब उसकी न्यायिक हिरासत की अवधि 25 जून तक बढ़ा दी गई है। रिशु श्री के साथ ही उसके सहयोगी मुमुक्षु चौधरी, उमेश कुमार सिंह, तारिणी दास और संतोष भी जेल में बंद है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस टेंडर घोटाले में रिशु श्री ही सबसे अहम कड़ी है। जितने भी सरकारी अधिकारी इस घोटाले में संलिप्त हैं, उन सभी के रिशु श्री के साथ नजदीकी संबंधों की बात सामने आई है। ऐसे में रिमांड पर लेने के बाद पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
ईडी द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों और रिपोर्ट में कई आईएएस अफसरों के नाम भी सामने आए हैं। एसवीयू यह भी जानना चाहती है कि रिशु श्री ने इन बड़े अधिकारियों तक जान पहचान और पहुंच कैसे बनाई ? किन लोगों ने उसके प्रारंभिक दौर में उसकी मदद की।
एसवीयू यह भी जानना चाहती है कि इस गोरखधंधे की शुरुआत कैसे हुई ? अफसरों तक घूस के पैसे कैसे पहुंचते थें ? कमीशन में किसका कितना हिस्सा होता था और कमीशन कैसे तय होता था ? इस गोरखधंधे का नेटवर्क कैसे चलता था ?
वहीं इस रिमांड के दौरान रिशु श्री द्वारा बनाई गई अलग अलग कंपनियों में किसने किसने कब से और कितना निवेश किया, यह सब सवाल भी पूछे जा सकते हैं।
रिमांड के दौरान रिशु श्री से पूरे देश की कंपनियों की भागीदारी वाले ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में सेटिंग कर टेंडर हासिल करने के आरोपों पर सवाल दर सवाल पूछे जाएंगे। जांच एजेंसी यह खुलासा चाहती हैं कि इतने बड़े पैमाने पर कथित रुप से कैसे हेराफेरी की जाती थी। वहीं रिशु श्री के विदेश दौरे भी एजेंसी के रडार पर हैं। उसने कई देशों की यात्रा थी, उनके उद्देश्य क्या थें ? वो विदेशों में किससे मिलता था ? सवाल यह भी पूछे जाएंगे कि क्या वो सरकारी अधिकारियों का उन देशों में संपत्ति निवेश भी कराता रहा है क्या !
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