आवारा कुत्तों की दहशत, घर से निकलना हुआ मुश्किल, बच्चे और बुजुर्गो का बुरा हाल !
एक रिपोर्ट के अनुसार पूरे बिहार में लगभग 07 लाख आवारा कुत्ते हैं। बिहार का कोई ऐसा गली, मोहल्ला, गांव, कस्बा या शहर नहीं है जहां पर इन आवारा कुत्तों का आतंक नहींं है। इनकी वजह से लोग या तो घर से बाहर नहीं निकलते हैं या फिर रास्ता ही बदल देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के बावजूद बिहार में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर कोई सरकारी पहल होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। पूरे बिहार में कुत्तों का आतंक और दहशत बढ़ता ही जा रहा है। ठंड के मौसम में भूखे प्यासे आवारा कुत्तों की वजह से लोगों का कहीं आना जाना मुश्किल हो चुका है। अकेले देखकर ये कुत्ते और भी ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार पूरे बिहार में लगभग 07 लाख आवारा कुत्ते हैं। बिहार का कोई ऐसा गली, मोहल्ला, गांव, कस्बा या शहर नहीं है जहां पर इन आवारा कुत्तों का आतंक नहींं है। इनकी वजह से लोग या तो घर से बाहर नहीं निकलते हैं या फिर रास्ता ही बदल देते हैं।
लगातार आ रही शिकायतों के बावजूद सरकार और प्रशासन इस समस्या पर काम करती हुई दिखाई नहीं दे रही है जबकि ये सीधे नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है और उनकी आजादी को प्रभावित कर रहा है। इन आवारा कुत्तों का इतना खौफ है कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं अकेले घर से बाहर निकल भी नहीं पा रही हैं।
रात के समय में और अहले सुबह इन कुत्तों का झुंड आदमी को देखते ही लपक जाते हैं। कई इलाकों में तो लोगों ने मॉर्निंग वॉक पर जाना ही छोड़ दिया है। आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर रहे इन आवारा कुत्तों की समस्याओं को सरकार कब गंभीरता से लेगी, ये देखने लायक बात होगी।
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