बिहार की बेटी ने बनाया इतिहास, दुनिया के सबसे ठंडे महाद्वीप पर रखा कदम, माइनस 100 डिग्री तापमान.....
आरती गुप्ता बिहार की पहली महिला होंगी जो विश्व के सर्वाधिक ठंडे और रहस्मयी माने जाने वाले अंटार्कटिका महाद्वीप जाने का अवसर मिला है। आरती गुप्ता राजधानी पटना के मौसम विज्ञान विभाग में मौसम वैज्ञानिक रुप के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहीं से उन्हें अंटार्कटिका शीतकालीन अभियान के लिए चुना गया है।
बिहार की बेटी आरती गुप्ता जो बिहारशरीफ की रहने वाली हैं। आरती गुप्ता ने रिकॉर्ड बना दिया है। आरती दुनिया के सबसे ठंडे महाद्वीप की यात्रा पर निकल चुकी हैं। एक ऐसा महाद्वीप जहां सर्दियों में तापमान माइनस 100 डिग्री सेल्सिय पहुंच जाता है। बता दें कि आरती गुप्ता इस यात्रा पर एक से डेढ़ साल तक रहने वाली हैं। आरती बिहार ही नहीं बल्कि भारतीय मौसम विभाग की प्रथम महिला वैज्ञानिक होंगी जो इस मिशन पर जा रही हैं।
आरती गुप्ता बिहार की पहली महिला होंगी जो विश्व के सर्वाधिक ठंडे और रहस्मयी माने जाने वाले अंटार्कटिका महाद्वीप जाने का अवसर मिला है। आरती गुप्ता राजधानी पटना के मौसम विज्ञान विभाग में मौसम वैज्ञानिक रुप के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहीं से उन्हें अंटार्कटिका शीतकालीन अभियान के लिए चुना गया है।
आरती गुप्ता के लिए अंटार्कटिका मिशन उनका सालों पुराना ख्वाब था। जब उन्होंने मौसम विज्ञान विभाग में अपनी सेवाएं देनी शुरु की थी, उस समय से ही विभागीय पत्र पत्रिकाओं में अंटार्कटिका अभियानों के बारे में पढ़कर उनके मन मे इसमें शामिल होने की इच्छा जागृत हुई थी।
इस अभियान का उद्देश्य अंटार्कटिका महाद्वीप जैसे जटिल माहौल में जीवन पर देश के वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाना है। इस टीम में आरती गुप्ता समेत कुल 52 सदस्य शामिल हैं। अंटार्कटिका शीतकालीन अभियान मौसम से संबंधित अध्ययनों और शोध के लिए है। इस वैज्ञानिक अनुसंधान में कई वैज्ञानिक, तकनीक के विशेषज्ञ, लॉजिस्टिक्स से जुड़े लोग, मेडिकल टीम एवं अन्य सहयोगी शामिल हैं।
आरती गुप्ता ने इस यात्रा से जुड़ी कई तस्वीरों को सोशल मीडिया पर जारी किया है। मालूम हो कि अंटार्कटिका को धरती का सर्वाधिक कठोर और जटिल महाद्वीप माना जाता है। इसे श्वेत महाद्वीप की भी संज्ञा दी गई है। गर्मियों में यहां का तापमान जीरो के आसपास रहता है और सर्दियों के मौसम में तो माइनस 100 डिग्री तक यहां का तापमान पहुंच जाता है। अंटार्कटिका महाद्वीप में जीवन की कल्पना अपने आप में रोचक है। यहां जीवनयापन किसी चुनौती से कम नहीं है।
आपको बता दें कि यह अभियान इतना आसान नहीं होता। इसके लिए कई स्तरों की चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसके पहले चरण में उम्मीदवारों को नई दिल्ली स्थित एम्स में सात दिनों के विशेष शारीरिक और मानसिक जांच की प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसके बाद आईटीबीपी के औली के पर्वतारोहण और स्कीइंग संस्थान में एक महिले का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें ऐसे वातावरण में जीवन, रिकॉर्ड तोड़ ठंड में जीवनयापन की शैली, आपात स्थितियों से निपटना और जिंदा रहने की तकनीक पर फोकस किया जाता है।
तब कहीं जाकर इस अभियान के लिए चयन होता है। एक ऐसा वातावरण जहां पर माइनस सौ डिग्री सेल्सियस तापमान हो, महीनों तक अंधकार ही अंधकार हो, बाहरी दुनिया से किसी भी तरह का कोई संपर्क न हो, संसाधन सीमित हो....ऐसे में जीवन व्यतीत करना और शोध कार्य करना कोई साधारण बात नहीं है। आरती गुप्ता के हौंसले और हिम्मत की सराहना करनी चाहिए जिन्होंने भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान को नई बुलंदी देने के लिए अपने जीवन के अगले एक से डेढ़ साल परिवार और समाज से दूर अंटार्कटिका के मिशन पर पहुंची हुई हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0