अब बिहार में सुधा ब्रांड की तर्ज पर बिकेगा " बकरी का दूध "
बिहार के बकरी पालकों के लिए बड़ी खबर है। द गोट ट्रस्ट और बिहार पशुपालन निदेशालय के बीच बड़ा समझौता हुआ है। बकरी पालने वालों की सहकारी समितियों के माध्यम से उन्हें संगठित किया जा रहा है।
बकरी पालकों की कभी किसी ने सुध नहीं ली लेकिन पहली बार बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने ऐसे पशुपालकों के लिए बड़े पैमाने पर काम करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए निर्णय लिया है। सम्राट सरकार बकरी पालकों की आमदनी बढ़ाने और उनकी आर्थिक प्रगति के लिए उन्हें संगठित दुग्ध अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।
बिहार राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड के मौजूदा दूध संग्रहण सिस्टम के माध्यम से गाय और भैंस की तरह बकरी के दूध का भी संग्रहण किया जाएगा। इसके बाद दूध की क्वालिटी और मार्केट डिमांड के अनुसार इसका प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर " सुधा ब्रांड " के तहत बाजार में लाने की योजना पर काम चल रहा है।
बिहार के पशुपालन मंत्री नंद किशोर राम ने बुधवार को बिहार पशुपालन निदेशालय एवं द गोट ट्रस्ट के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर के अवसर पर कहा कि यह एक बड़ा कदम है। कम पूंजी और सीमित संसाधनों ने बकरी पालन संभव होने की वजह से यह छोटे और सीमांत पशुपालकों एवं ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन होगा।
मंत्री ने कहा कि बकरी को हमारे यहां काफी समय से गरीब की गाय कहा जाता रहा है लेकिन अब इसे पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि के लिए बनाकर रहेंगे।
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