कहीं तेजस्वी की जगह प्रशांत किशोर तो नहीं लेने जा रहे हैं ! तेजस्वी से ज्यादा एक्टिव तो प्रशांत किशोर दिखाई दे रहें !
शून्य पर सिमटने वाले जनसुराज और उसके सूत्रधार प्रशांत किशोर एक्टिव नजर आ रहे हैं। प्रशांत किशोर को उम्मीदों से बिल्कुल विपरीत नतीजे मिलें। उनका कोई उम्मीदवार जीत नहीं पाया लेकिन प्रशांत किशोर समय समय पर बिहार की जनता के बीच नजर आ रहे हैं। लोगों के दुख सुख में शामिल हो रहे हैं। जनसुराज की गतिविधिया खासतौर पर संगठन के नए सिरे से निर्माण का काम तेज गती से चल रहा है।
Bihar Politics बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति शिथिल पड़ चुकी है। खास तौर पर विपक्ष के रोल में जिस तरह से तेजस्वी यादव को नजर आना चाहिए था, वैसे वो दिखाई नहीं पड़ रहे हैं। तेजस्वी यादव तो कई मौकों पर विधानसभा की कार्यवाही से भी नदारद दिखाई पड़ें। चुनावों में हार जीत होती रहती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि विपक्ष का नेता सदन की कार्यवाही से गायब हो जाए।
इसके ठीक उलट शून्य पर सिमटने वाले जनसुराज और उसके सूत्रधार प्रशांत किशोर एक्टिव नजर आ रहे हैं। प्रशांत किशोर को उम्मीदों से बिल्कुल विपरीत नतीजे मिलें। उनका कोई उम्मीदवार जीत नहीं पाया लेकिन प्रशांत किशोर समय समय पर बिहार की जनता के बीच नजर आ रहे हैं। लोगों के दुख सुख में शामिल हो रहे हैं। जनसुराज की गतिविधिया खासतौर पर संगठन के नए सिरे से निर्माण का काम तेज गती से चल रहा है।
आरजेडी से इतर जनसुराज में सांगठनिक गतिविधियां जारी है। नए सिरे से संगठन पुननिर्माण का काम चल रहा है। चुनाव में मिली हार के बाद जहां जनसुराज खुद को बदलने में लगा है तो वहीं आरजेडी में जस की तस स्थिति बनी हुई है। आरजेडी में सिर्फ तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई है जबकि कायदे से आरजेडी संगठन को उपर से लेकर नीचे तक बदलने की जरुरत आज की तारीख में है। प्रदेश से लेकर पंचायत तक आरजेडी का संगठन ध्वस्त हो चुका है। यह हाल पूरे बिहार का है।
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद प्रशांत किशोर की रणनीति के तहत जनसुराज की सभी जिला इकाइयों को भंग कर दिया गया था। अब नए सिरे से जनसुराज का संगठन बनाया जा रहा है। नई रणनीति के तहत जनसुराज ने अपने लिए 44 संगठन जिलों का निर्माण किया है। इसे जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने और जनता की आवाज बनने के लिए निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं।
उधर आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल अभी तक किसी भी जिले का दौरा करते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं। वो चुनाव के पहले भी कहीं नहीं जाते थें और चुनाव के बाद भी कभी नहीं दिखाई पड़ें। तेजस्वी यादव तो बड़े नेता हैं, वो भी कहीं आते जाते हुए दिखाई नहीं पड़तें, इसके ठीक उलट प्रशांत किशोर अलग अलग जिलों में जा रहे हैं, बिना कोई शोरगुल मचाए हुए।
प्रशांत किशोर को मालूम है कि जातियों के खांचे में बंटे बिहार की राजनीति इतनी आसान नहीं है। वो साफ तौर पर कहते हैं कि बिहार में बदलाव की लड़ाई कोई एक दो साल की लड़ाई नहीं है। ये एक लंबी लड़ाई है। इस बदलाव को पूरा करने में 05 साल से 10 साल तक समय लग सकता है। प्रशांत किशोर कहते हैं कि समाज में सोच को बदलने, लोगों को जागरुक करने को और राजनीति की दिशा बदलने में वक्त लगता है। इसकी प्रक्रिया शुरु हो चुकी है।
आशावादी लोगों को लगता है कि एक दिन बिहार के लोग प्रशांत किशोर को जरुर चुनेंगे। जिन्हें बिहार की चिंता होगी, वो जनसुराज के साथ जाएगा। उधर तेजस्वी यादव की स्थिति यह है कि उनके माई समीकरण में से वाई रह गया है और एम निकल गया है। आश्चर्यजक रुप से बिहार की राजनीति की अगली दिशा कांग्रेस के हाथों में आ गई है। वो कांग्रेस जो अपने दम पर बिहार में शायद एक सीट नहीं निकाल सकती है। बिहार का मुसलमान आरजेडी से नाराज दिखाई दे रहा है। उसे कांग्रेस से कोई दिक्कत नहीं है।
ऐसे में जो खबरें आ रहीं हैं कि बीते दिनों प्रशांत किशोर और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बीच मीटिंग हुई प्रशांत किशोर इस मीटिंग से इनकार भी नहीं कर रहे। अगर सच में जनसुराज और कांग्रेस के बीच खिचड़ी पक रही है तो ये तेजस्वी और राजद के लिए बुरी खबर है। कांग्रेस जिस दिन राजद से अलग हुई उस दिन मुस्लिम और धर्मनिपेक्ष वोटर वर्ग का एक अलग खेमा तैयार हो जाएगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0