तेजस्वी की हार के " गुनहगार "

तेजस्वी यादव की हार के गुनाहगारों का नाम जानना जरूरी है। पूरे आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें।

Jan 7, 2026 - 14:08
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तेजस्वी की हार के " गुनहगार "

" तेजस्वी की हार के लिए कौन जिम्मेदार...जानिए बड़े दुश्मनों के नाम " 

तेजस्वी और राजद की हार के चार बड़े कारण...यहां जान लीजिए। 

किसी ने सोचा भी नहीं था, ऐसी हार तेजस्वी यादव की हो गई। समीकरणों के हिसाब से नीतीश कुमार और एनडीए पहले से मजबूत दिख रहे थें पर इतने भी मजबूत नहीं दिख रहे थें कि ऐसा प्रचंड जनादेश उनके पक्ष में आ गया।

बिहार पहले की तरह ही पलायन और बेरोजगारी की समस्या से बुरी तरह से जूझ ही रहा है। बिहार के लोग थोक के भाव में दो पैसे और दो रोटी के जुगाड में दूसरे प्रदेशों में पहले की तरह जा ही रहे हैं फिर भी इतनी बड़ी जीत...कहीं न कहीं इशारा तो करती ही है। 

आज हम चर्चा करेंगे पिछले विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल, इंडिया गठबंधन और महागठबंधन की अप्रत्याशित हार के बारे में...

तेजस्वी यादव की हार की सबसे बड़ी वजह महिलाओं के खाते में 10,10 हजार रुपए बांटा जाना रहा। आचार संहिता लगने के बाद भी पैसे खाते में डाले गए। जीविका दीदियां इस चुनाव में एनडीए के एजेंट की तरह काम करती दिखाई दीं। 

हार की दूसरी सबसे बड़ी वजह तेजस्वी यादव खुद हैं। किसी रियासत के महाराज की तरह नामांकन के आखिरी दिन तक आवास के बाहर मजमा लगाकर टिकट बांटना बेहद गलत था। इससे बाहर में मैसेज गया कि राजद में टिकट बेचे जा रहे हैं। हालांकि सामाजिक न्याय और भागीदारी का गणित देखें तो राजद ने टिकटों का बंटवारा काफी हद तक सही किया था लेकिन अंतिम समय तक टिकट बांटना उनके लिए भारी पड़ा।

तेजस्वी के सबसे बकवास निर्णयों में वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम घोषित करना था। मुकेश सहनी अपने मुंह मियां मिट्ठू हैं। इनकी पार्टी का न तो संगठन दिखता और न वोटर। ये फील्ड में जाकर मेहनत करते हुए दिखाई भी नहीं पड़ते। मुकेश सहनी का बॉडी लैंग्वेज भी किसी को नहीं भाता, ऐसे में इन्हें डिप्टी सीएम का उम्मीदवार घोषित करने से राजद के परंपरागत वोटरों पर बहुत खराब प्रभाव पड़ा। इससे अच्छा होता की तेजस्वी यादव कांग्रेस के किसी मुस्लिम लीडर को डिप्टी सीएम उम्मीदवार घोषित कर देते। 

चौथी सबसे बड़ी वजह रही राजद का कांग्रेस को कम आंक कर चलना। कहते हैं कि मरा हुआ हाथी भी सवा लाख का होता है। कांग्रेस कितनी भी कमजोर हो लेकिन माले और वीआईपी जैसी पार्टियों से बहुत ऊपर की चीज है। 

राजद के नेता और समर्थक कांग्रेस को नीचा दिखाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते हैं। कांग्रेस की तुलना में माले के स्ट्राइक रेट की चर्चा खूब होती रही लेकिन राजद समर्थकों को कांग्रेस का त्याग और मेहनत नजर नहीं आई। 

राहुल गांधी तेजस्वी को सीएम बनाने के लिए बिहार की गलियों में भटकते नजर आएं। गली मुहल्ले, खेत खलिहान, नदी नहर तालाब में नजर आएं लेकिन राजद को उनका धन्यवाद करना चाहिए था और राजद ने उनके साथ फ्रेंडली फाइट शुरू कर दिया।

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