मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है ?
जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है।
हिंदू परम्परा में भगवान सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है। जब सूर्य मकर राशि की ओर प्रस्थान करते हैं, तब मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है। मकर संक्रांति बसंत ऋतु के आगमन का भी संकेत होता है।
मकर संक्रांति के बाद से दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी। अलग अलग प्रदेशों में इस पर्व को अलग अलग नाम से मनाया जाता है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में इसे " खिचड़ी " कहा जाता है।
बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर दही चूड़ा खाने की विशिष्ट परम्परा है। पंजाब में इसे लोहड़ी के नाम से मनाया जाता है। तमिलनाडु में इस दिन पोंगल मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोग इस दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करते हैं। दान पुण्य करते हैं। मकर संक्रांति के दिन वस्त्र, कंबल, गुड़, तिल और अन्न का दान करना बेहद शुभ फलदायक माना जाता है।
मकर संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है और सनातन परंपरा के अनुसार पुनः शुभ कार्यों का शुभारम्भ हो जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने असुरों का संहार किया था और उनके शीश को मंदार पर्वत पर गाड़ दिया था। इस कथा के अनुसार यह भगवान विष्णु का विजय पर्व भी है।
मकर संक्रांति 2026 : इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी दिन बुधवार को मनाया जाएगा।
मकर संक्रांति पुण्यकाल : 03:13 PM से 05:45 PM तक
(Disclaimer: यहां बताई गई सारी बातें लोक मान्यताओं और आस्था पर आधारित है। हम किसी भी तथ्य का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं दे रहे हैं। )
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