Bihar elections के बाद शेयर बाजार में उछाल! Nifty 26,000 पार, NDA की जीत ने बढ़ाई निवेशकों की उम्मीदें
Bihar elections के नतीजों ने भारतीय शेयर बाजार में उत्साह की लहर पैदा कर दी है। इसके पहले चरण के मतदान और अंतिम चरण के मतदान के बाद, निफ्टी में उछाल
Bihar elections के नतीजों ने भारतीय शेयर बाजार में उत्साह की लहर पैदा कर दी है। इसके पहले चरण के मतदान और अंतिम चरण के मतदान के बाद, निफ्टी में उछाल देखा गया था, जो चुनाव परिणामों के बाद और भी मजबूती के साथ बना रहा। 29 अक्टूबर के बाद पहली बार निफ्टी50 ने 26,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार किया। मोटिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ ने कहा कि बिहार में एनडीए की शानदार जीत भारतीय स्टॉक मार्केट के लिए नए उत्साह को जन्म देगी और निफ्टी में लंबी अवधि तक रैली जारी रहने की संभावना को मजबूत करेगी।
मोटिलाल ओसवाल ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए ने 243 सीटों में से 202 सीटें जीतकर 46.6 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। इस स्पष्ट जनादेश से नीति निरंतरता, शासन की स्थिरता और विकास-केंद्रित राजनीतिक माहौल के लिए उम्मीदें बढ़ी हैं। मौजूदा समय में मैक्रो और एर्निंग संकेतक पहले ही बाजार के अनुकूल स्थिति में हैं। इस प्रकार, बिहार का जनादेश निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने और शेयर बाजार में सकारात्मक धारणा बनाने में सहायक है।
दूसरे कारकों का बाजार पर प्रभाव
मोटिलाल ओसवाल ने अपने रिपोर्ट में अन्य सकारात्मक कारकों का भी उल्लेख किया। इसमें आरबीआई और सरकार द्वारा किए जा रहे सुधार, जीएसटी 2.0 के कारण बढ़ती खपत और मांग में सुधार, ब्याज दरों में नरमी और कॉर्पोरेट आय में सुधार शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय शेयर बाजार ने पिछले एक साल में अपने इमर्जिंग मार्केट समकक्षों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। निफ्टी ने सितंबर 2024 से 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की, जबकि MSCI EM ने 20 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। राजनीतिक स्थिरता और सुधारित कॉर्पोरेट आय से यह अंतर कम होने की उम्मीद है।
डबल-इंजन सरकार का महत्व
मोटिलाल ओसवाल के अनुसार, बिहार का परिणाम "डबल-इंजन सरकार" की अवधारणा को मजबूत करता है, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नीति कार्यान्वयन में बेहतर समन्वय स्थापित होगा। यह बाजार के लिए महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत है। साथ ही, बिहार के मतदाताओं की प्राथमिकताओं में बदलाव देखा गया है, जहां जातिगत राजनीति से हटकर विकास-केंद्रित मुद्दों की ओर झुकाव बढ़ा है। हालांकि, एनडीए की जीत से अल्पकालिक बाजार उत्साह तो बढ़ेगा, लेकिन निवेशकों की नजर जल्द ही आगामी मैक्रो संकेतकों पर जाएगी, जिसमें जीएसटी 2.0 से बढ़ी खपत की स्थिरता, आरबीआई की नई टिप्पणियाँ, वैश्विक संकेतक और कॉर्पोरेट आय की प्रगति शामिल है।
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