सम्राट को सुशील मोदी ने दिलाई थी भाजपा की सदस्यता, 09 साल का सफर....
सुशील कुमार मोदी ने बिहार में भाजपा को मजबूती से स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई। राष्ट्रीय जनता दल और लालू राबड़ी की सरकार को उखाड़ फेंकने में उनके संघर्ष की बड़ी भूमिका रही लेकिन वो कभी बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बन सकें। एक समय में वो बिहार में विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा रहें लेकिन उपमुख्यमंत्री से आगे वो नहीं बढ़ सकें। किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और एक दिन वो असमय दुनिया छोड़ कर चले गए।
बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भाजपा में लाने का श्रेय दिवंगत नेता सुशील कुमार मोदी को जाता है। सुशील कुमार मोदी के ही प्रयासों की वजह से सम्राट चौधरी भाजपा में शामिल हुए थें। वो साल 2017 का था। भाजपा में महज 08 सालों के राजनीतिक सफर में सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हो गए। सम्राट चौधरी का राजनीतिक जन्म राष्ट्रीय जनता दल में हुआ था।
सुशील कुमार मोदी ने बिहार में भाजपा को मजबूती से स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई। राष्ट्रीय जनता दल और लालू राबड़ी की सरकार को उखाड़ फेंकने में उनके संघर्ष की बड़ी भूमिका रही लेकिन वो कभी बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बन सकें। एक समय में वो बिहार में विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा रहें लेकिन उपमुख्यमंत्री से आगे वो नहीं बढ़ सकें। किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और एक दिन वो असमय दुनिया छोड़ कर चले गए।
सम्राट चौधरी भी राजनीति में परिवारवाद की ही उपज हैं। ये अलग बात है कि भारतीय जनता पार्टी राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद पर ज्यादा मुखर रहती है। उनके पिता शकुनी चौधरी कभी कांग्रेस के नेता हुआ करते थें। बाद के दिनों में शकुनी चौधरी जनता दल, राष्ट्रीय जनता दल, समता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, हिंदुस्तानी अवाम मोरचा तक में रहें। इसी राजनीतिक विरासत की वजह से सम्राट चौधरी राबड़ी देवी की सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री भी बनें।
भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय की टीम में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। इसी कालखंड से सम्राट चौधरी का भाजपा में तेजी से उभार हुआ। वर्ष 2020 में बिहार में एनडीए की सरकार बनीं तो सम्राट चौधरी पंचायती राज मंत्री बनें। गठबंधन टूटा तो वो बिहार विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता बनें। उनका मुरेठा बिहार की राजनीति में विपक्ष का प्रतीक बन गया। नीतीश सरकार के विरोध में उनकी छवि मजबूती से स्थापित होती गई।
फिर साल आया 2023 का। सम्राट चौधरी को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर रहते हुए सम्राट चौधरी की छवि और ज्यादा निखर गई। उन्होंने विपक्ष पर खूब प्रहार किया और मजबूत राजनेता के तौर पर स्थापित हुए। सुशील कुमार मोदी के निधन की वजह से एक जोरदार विपक्षी नेता की कमी महसूस हो रही थी, सम्राट ने उस कमी को एक हद तक दूर कर दिया। उनके नेतृत्व में भाजपा के कार्यकर्ताओं में जोश और जुनून देखने को मिला। 2024 में एनडीए की सरकार में उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान वो बिहार भाजपा के सबसे बड़े चेहरे बनें रहें। पार्टी को इस चुनाव में भी बड़ी सफलता प्राप्त हुई। 2025 के विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी ही भाजपा की ओर से सबसे बड़े चेहरा थें और नतीजा सबके सामने है। गृह मंत्री के रुप में भी सम्राट चौधरी सफल साबित हुए।
तमाम पदों पर रहते हुए सम्राट चौधरी ने सरकार, संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच खुद को मजबूती से स्थापित किया। आज सम्राट चौधरी बिहार के सबसे बड़े कुशवाहा लीडर के रुप में भी उभर चुके हैं। यादवों में जो कद तेजस्वी यादव का है, पासवानों में जो कद चिराग पासवान का है, वही कद कुशवाहा बिरादरी में आज सम्राट चौधरी का बन चुका है। भाजपा में आज सम्राट ही सबसे बड़े पोस्टर ब्वॉय हैं, उनके आगे सब गौण हो चुके हैं।
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