नीतीश की यात्रा के बीच तेजस्वी की " सिंघम एंट्री "

इधर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा में हैं और उधर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी एक्टिव मोड में आ गए हैं। बिहार की राजनीति एक बार फिर से गरम होने की उम्मीद है।

Jan 17, 2026 - 21:18
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नीतीश की यात्रा के बीच तेजस्वी की " सिंघम एंट्री "

बिहार का राजनीतिक माहौल गरम होने वाला है। कुर्सी की पेटी बांध लीजिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा पर निकल चुके हैं तो उधर नेता विपक्ष तेजस्वी यादव भी एक्टिव होते हुए दिखाई दे रहे हैं। सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें की जा रही है। भविष्य की रणनीतियों पर मंथन शुरू हो चुका है। 

तेजस्वी यादव ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि नई सरकार को वो अपनी ओर से 100 दिन का समय दे रहे हैं। 100 दिनों तक वो सरकार पर कोई टीका टिप्पणी नहीं करेंगे। दरअसल तेजस्वी का यह 100 दिन सरकार के लिए नहीं बल्कि अपनी यानी विपक्षी राजनीति की " प्रैक्टिस " के लिए है। 

तेजस्वी यादव इन 100 दिनों ने राजद संगठन के तमाम कील कांटों को दुरुस्त करेंगे। नए चेहरों को संगठन में आगे किया जाएगा। पहला फोकस खुद को मजबूत करना होगा, उसके बाद सरकार को घेरने की नीति तय की जाएगी। तेजस्वी को यह मालूम है कि सरकार को घेरने के लिए मुद्दों की कोई कमी नहीं होगी। 

अब तेजस्वी का विरोध सिर्फ विरोध नहीं होगा बल्कि उस विरोध की गूंज राज्य के हर गांव गली मुहल्ले और चौक चौराहों पर होगी। सरकार के दावे और जमीनी हकीकत की पड़ताल होगी और सच को विपक्ष सबके सामने लाएगा। तेजस्वी का यह अंदाज पहले से ज्यादा आक्रामक किंतु अनुशासित है।

रिपोर्ट्स की मानें तो तेजस्वी यादव ने पार्टी के बड़े नेताओं के साथ बैठक कर साफ साफ संदेश दे दिया है कि पार्टी और संगठन को जनता के बीच दिखना होगा। जनता को लगना चाहिए उनके हर दुख, पीड़ा, समस्या और तकलीफ में राष्ट्रीय जनता दल उनके साथ खड़ी है। 

तेजस्वी इस बात को भी भली भांति समझते हैं कि बिहार की लड़ाई उनके लिए आसान नहीं है। उनका मुकाबला केंद्र और राज्य में बैठी सत्ता और उनकी मशीनरी से है। ऐसी लड़ाई भी अलग अंदाज में लड़नी होगी। राजनीति के लिहाज से तेजस्वी यादव की उम्र भी बहुत बड़ी नहीं है। अभी तेजस्वी को बहुत कुछ पाना खोना है। 

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