रील बनाने की आदत पड़ेगी भारी, सरकारी कर्मचारी हो जाएं सावधान, नीतीश कैबिनेट का बड़ा फैसला.....
बिहार सरकार के कर्मचारियों के लिए अब सोशल मीडिया का इस्तेमाल आसान नहीं रह जाएगा बल्कि अब यह नियम और कानून के दायरे में आएगा। बिहार कैबिनेट की नए निर्णय के अनुसार अब राज्य सरकार के कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर नया अकाउंट बनाने से पहले अपने सीनियर अधिकारी से परमिशन लेना होगा। सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार का पर्सनल कमेंट, विवादित या अभद्र पोस्ट पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
Bihar Cabinet News अगर आप बिहार सरकार के कर्मचारी हैं और आपको रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की आदत है तो हो जाइए सावधान। अब रील बनाना सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगा पड़ सकता है। बिहार कैबिनेट की बैठक में सरकारी कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
बिहार सरकार के कर्मचारियों के लिए अब सोशल मीडिया का इस्तेमाल आसान नहीं रह जाएगा बल्कि अब यह नियम और कानून के दायरे में आएगा। बिहार कैबिनेट की नए निर्णय के अनुसार अब राज्य सरकार के कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर नया अकाउंट बनाने से पहले अपने सीनियर अधिकारी से परमिशन लेना होगा। सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार का पर्सनल कमेंट, विवादित या अभद्र पोस्ट पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
https://youtu.be/amZH5gvOaSE?si=zxyIL5Rvx2RtkLQx
सरकार की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म यथा फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम आदि का दुरुपयोग करने वाले सरकारी कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों पर कड़ा एक्शन लिचा जाएगा। सरकारी नीतियों पर अपनी राय व्यक्त करना, आपत्तिजनक पोस्ट और कमेंट करना कदाचार के दायरे में आएगा।
अगर आप सरकारी कर्मचारी या अधिकारी हैं तो आपको अपना सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से पहले अपने सीनियर से इसकी परमिशन लेनी होगी। किसी सरकारी सेवक द्वारा फेक या किसी दूसरे नाम से आईडी बनाने और उसे चलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी सरकारी सेवक सोशल मीडिया के माध्यम से किसी भी प्रकार का कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं ले सकेगा।
सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल से जुड़ा सबसे बड़ा दिशा निर्देश यह है कि अपने ऑफिस, साइट या कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का वीडियो बनाना, लाइव करना या किसी भी प्रकार की सरकारी गतिविधियों को सोशल मीडिया पर पोस्ट, अपलोड या शेयर करना पूरी तरह से अनुशासनहीनता माना जाएगा और ऐसी किसी गतिविधि में संलिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी प्रकार की विभागीय चर्चा, कार्यस्थल से जुड़े मामले, आधिकारिक प्रक्रिया, कागजात, फाइल्स आदि को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करना कदाचार की श्रेणी में आएगा।
बिहार सरकार की ओर सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि सरकारी सेवक हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, सरकारी नीतियों, आदेशों पर अपनी निजी राय सोशल मीडिया पर जाहिर नहीं करेंगे। अपने सीनियर्स के विरु़द्ध सोशल मीडिया पोस्ट करना, उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल भी दंडनीय कार्रवाई के दायरे में आएगा।
कोई भी सरकारी सेवक सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में दरार पैदा करने वाली, किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक और भड़काउ पोस्ट नहीं कर सकेगा और नहीं किसी भी प्रकार की ट्रोलिंग का भाषा का इस्तेमाल करेगा। सरकार ने साफ किया है कि ऐसी किसी भी प्रकार की गतिविधियां में सरकारी सेवकों की संलिप्ततता पाए जाने पर इसे सरकारी सेवा नियमावली का उल्लंघन माना जाएगा और उचित विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
राज्य के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंन्द्र के मुताबिक सरकार हर स्तर पर सरकारी व्यवस्था की मर्यादा और प्रशासिनक अनुशासन को कायम रखना चाहती है। इस विषय को लेकर सरकार पूरी तरह से गंभीर है। बता दें कि यह पूरा प्रावधान बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के तहत लागू होगा।
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