खतरा टला नहीं है, सिर्फ 07 महीने के लिए मिली है MLC की कुर्सी
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का टेंशन 7 महीने के लिए खत्म हो गया है। देवेश कुमार की जगह वो MLC बन गए हैं। फिलहाल उनका मंत्री पद सुरक्षित हो गया है लेकिन 7 महीने के बाद उनका क्या होगा !
राष्ट्रीय लोक मोरचा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने राजनीतिक कौशल का परिचय देते हुए अपने बेटे दीपक प्रकाश की कुर्सी को सुरक्षित रखा लिया है। बिहार के राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया है। दीपक प्रकाश का ये कार्यकाल सिर्फ सात महीनों का ही होगा। मार्च 2027 में उनका ये कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। इसका मतलब साफ है कि मार्च के बाद उपेंद्र कुशवाहा को एक बार फिर से भाजपा से एमएलसी की सीट मांगनी पड़ेगी।
ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा की मुश्किल तो टली है लेकिन सिर्फ सात महीने के लिए। सात महीने के बाद एक बार फिर से उनकी मुश्किलें बढेंगीं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि भाजपा उपेंद्र कुशवाहा पर उनके दल के विलय का लगातार दबाव बना सकती है। अभी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों की वजह से भाजपा थोड़े दबाव में है लेकिन सात महीन के बाद भाजपा इस दबाव से बाहर होगी।
बता दें कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के चार विधायक हैं। उनमें एक उनकी पत्नी भी हैं। एक विधायक आलोक सिंह प्रदेश अध्यक्ष हैं। एक समय ऐसा भी आया था कि दीपक प्रकाश के मंत्री बन जाने की वजह से विधायकों में नाराजगी देखी गई थी जिसे बाद में उपेंद्र कुशवाहा ने मामला संभाल लिया था।
एक बात तो तय है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी तभी तक एकजुट और सुरक्षित है जब तक भाजपा चाहेगी। जिस दिन भाजपा को जरुरत महसूस होगी, उनकी पार्टी टूट कर बिखर जाएगी। ऐसे हालात में उपेंद्र कुशवाहा को अपने तमाम राजनीतिक फैसले सोच समझ कर ही लेने होंगे।
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