कांग्रेस के इस विधायक की तारीफ करनी होगी, भाजपा से मिला प्रलोभन ठुकराया....
अभिषेक ने अपने इंटरव्यू में कहा कि उनके लिए उनकी पार्टी कांग्रेस ही सर्वोपरी है और कोई भी प्रलोभन उन्हें इधर से उधर नहीं कर सकती। अभिषेक का यह बयान उस समय में आया है जब कांग्रेस के 03 विधायकों की गद्दारी चर्चा का विषय बना हुआ। अभिषेक ने साफ तौर पर कहा कि आफॅर उन्हें दिया गया थे लेकिन वो कांग्रेस की विचारधारा और संविधान बचाने की लड़ाई में मजबूती से खड़े रहें।
बिहार में संपन्न हुआ राज्यसभा का चुनाव कांग्रेस विधायकों की वजह से खासा चर्चा में रहा। 03 कांग्रेस विधायक वोटिंग से गैरहाजिर रहें और एनडीए का उम्मीदवार चुनाव जीत गया। बिहार कांग्रेस के विधायक अभिषेक रंजन ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्हें भी भाजपा की ओर से प्रलोभन मिला था लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया।
एक मीडिया हाउस को दिए गए अपने साक्षात्कार में बिहार की चनपटिया सीट से पहली बार जीते विधायक अभिषेक रंजन ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्हें भारतीय जनता पार्टी द्वारा ऑफर मिला जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। अभिषेक ने कहा कि ये लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं बल्कि विचारधारा और सिद्धांत की है।
अभिषेक ने अपने इंटरव्यू में कहा कि उनके लिए उनकी पार्टी कांग्रेस ही सर्वोपरी है और कोई भी प्रलोभन उन्हें इधर से उधर नहीं कर सकती। अभिषेक का यह बयान उस समय में आया है जब कांग्रेस के 03 विधायकों की गद्दारी चर्चा का विषय बना हुआ। अभिषेक ने साफ तौर पर कहा कि आफॅर उन्हें दिया गया थे लेकिन वो कांग्रेस की विचारधारा और संविधान बचाने की लड़ाई में मजबूती से खड़े रहें।
हालांकि कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन जो दावा कर रहे हैं, वो सनसनीखेज है। अगर उनके दावे में सच्चाई है तो ये बेहद घटिया है। इस तरह से चुनाव जीतने के लिए विधायकों को लोभ लालच देना कितना सही है ! विधायक अभिषेक रंजन का यह बयान भाजपा की राजनीति की सच्चाई बताने के लिए पर्याप्त है। भारत का लोकतंत्र किस प्रकार से धनतंत्र में बदल चुका है, इसे बताने की जरुरत नहीं है।
अभिषेक रंजन के इस बयान ने वोटिंग से गैरहाजिर रहे विधायकों की भूमिका और चरित्र पर सवाल खड़े कर दिए है। किस प्रकार का लोभ लालच विधायकों को दिया होगा, यह बताने की जरुरत नहीं है। वोट के लिए नहीं बल्कि चुनाव में वोट नहीं देने के लिए प्रलोभन देना अनुचित है। इस पर किसी किस्म की कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है क्योंकि किसी के पास इस बात का सबूत नहीं है किसने पैसे दिए, किसको दिए और कितने पैसे दिए।
वैसे विधायक अभिषेक रंजन ने मौजूदा माहौल में हॉर्स ट्रेडिंग से इंकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा दी है। बीजेपी ने जनता का संविधान के प्रति विश्वास को तार तार करने का काम किया है। वो राज्यसभा का चुनाव जीतकर भी नैतिक रुप से हार गई है।
उन्होंने कहा कि मैं युवा कांग्रेस के रास्ते मुख्यधारा की राजनीति में आया हूं। आज मेरी जो पहचान है, वो कांग्रेस की वजह से है। कांग्रेस सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक विचारधारा है। मेरा किसी दूसरी पार्टी में जाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। अभिषेक रंजन आगे कहते हैं कि सियासत में स्थाई तो कुछ भी नहीं होता लेकिन मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि मैं कांग्रेस के साथ ईमानदारी से खड़ा हूं। मैं अपने पांच साल का कार्यकाल कांग्रेस के साथ ही पूरा करुंगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुझे कभी पार्टी छोड़नी भी पड़ी तो पूरे मान सम्मान के साथ जाउंगा, कोई मुझे कभी यह नहीं कहेगा कि अभिषेेेेेेेेेेेेक रंजन ने कांग्रेस के साथ गद्दारी की।
आज की तारीख में जो माहौल देश में और खास तौर पर कांग्रेस की राजनीति में हो गया है कि कौन नेता कब पार्टी छोड़ जाए, कहा नहीं जा सकता वैसे में चनपटिया के विधायक अभिषेक रंजन एक मिसाल हैं। हर तरह के साम दाम दंड भेद और लोभ लालच को ठुकराना कोई साधारण बात नहीं है। अभिषेक रंजन जैसे ईमानदार नेताओं की सराहना होनी चाहिए और संदेश दिया जाना चाहिए कि जनता का भला ईमानदार नेता ही कर सकते हैं, वोटिंग से गैर हाजिर रहने वाले नहीं और विधायकों को खरीदने वाले तो बिल्कुल ही नहीं।
इसके साथ ही आपको बता दें कि विधायक अभिषेक रंजन चनपटिया सीट से बेहद कड़े मुकाबले में जीते थें। उन्होंने भाजपा के उमाकांत सिंह को लगभग 600 वोट से हराया था और तीसरे स्थान पर चर्चित यूट्यूबर पत्रकार मनीष कश्यप थें।
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