एक ऐसा मंदिर, जिसको बनाने के लिए मां काली ने खुद की थी भविष्यवाणी....

इस स्थान पर जो भी श्रद्धा भावना से मां काली से जो भी मन्नत मांगता है, मां उसकी हर प्रार्थना स्वीकार करती हैं। लोगों का भरोसा इस पवित्र स्थल से इतना बढ़ा कि पूरे भारत से लोग यहां आने लगें। मां की महिमा विदेशों तक फैलने लगी। लोग विदेशों में से यहां पर आने लगें। आज भी इस स्थान पर हर साल लाखों सिर झुकते हैं और मां सबकी मनोकामना पूर्ण करती हैं।

Dec 18, 2025 - 21:42
Dec 19, 2025 - 10:44
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एक ऐसा मंदिर, जिसको बनाने के लिए मां काली ने खुद की थी भविष्यवाणी....

जय मां काली, बखोरापुर वाली। कई गाड़ियों पर जब यह लिखा हुआ देखा तो उत्सुकता जगी इस मंदिर के महत्व के बारे में जानने की। अगर आप भी दैवीय शक्ति में यकीन रखते हैं तो आपको एक बार बखोरापुर वाली मां काली के मंदिर के दर्शन पूजन के लिए जरुर जाना चाहिए। 

बिहार के भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर गांव में यह अति प्रसिद्ध मां काली का मंदिर है। लाखों लोगों की आस्था इस पवित्र स्थान से जुड़ी हुई है। वर्ष 1862 तक यह एक छोटा सा देवी स्थान था जहां पर मातारानी एक पिंडी के रुप में स्थापित थीं। जनभावना और लोक आस्था जुड़ती गई और वर्ष 2003 में इस स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। यहां पर देवी मां की प्रतिमा को स्थापित किया गया। प्रत्येक वर्ष नवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पर आते हैं। 

मां काली मंदिर, बखोरापुर को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। साल 1862 में इस इलाके में हैजा फैला था। 500 से ज्यादा लोग असमय काल के गाल में समा गए। गांव में एक महात्मा का आगमन हुआ। उन्होंने यहां पर मां काली की पिंडी स्थापना करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उनका विश्वास है कि ऐसा करने पर यह बीमारी यहां से खत्म हो जाएगी। लोगों ने ऐसा ही किया। इसी स्थान पर नीम के पेड़ के पीछे मां काली की नौ पिंडियां स्थापित की गई और लोगों ने पूजा अर्चना शुरु कर दिया। महात्मा की बात सही साबित हुई। गांव से हैजा खत्म हो गया और इसके बाद वो महात्मा भी अदृश्य हो गए। 

समय बीतता गया, लोग पिंडियों की पूजा करते रहें। जिस स्थान पर पिंडी स्थापना की गई थी, उसके पास से एक नाला बहता था। यहां आकाशवाणी हुई कि नाले के पास से मां की पिंडी को हटाया जाए अन्यथा मां यहां से प्रस्थान कर जाएंगी। लोगों ने आकाशवाणी को माता का आदेश मानकर पिंडी को वहां से दूसरे स्थान पर ले जाकर स्थापित कर दिया। 1862 में यहां पर एक छोटा सा मंदिर बनाया गया। लोगों की आस्था और भावना इस स्थान से जुड़ी रही। उस वक्त से ही मां काली मंदिर, बखोरापुर प्रसिद्ध होने लगा। 

लोक मान्यता है कि इस स्थान पर जो भी श्रद्धा भावना से मां काली से जो भी मन्नत मांगता है, मां उसकी हर प्रार्थना स्वीकार करती हैं। लोगों का भरोसा इस पवित्र स्थल से इतना बढ़ा कि पूरे भारत से लोग यहां आने लगें। मां की महिमा विदेशों तक फैलने लगी। लोग विदेशों में से यहां पर आने लगें। आज भी इस स्थान पर हर साल लाखों सिर झुकते हैं और मां सबकी मनोकामना पूर्ण करती हैं। 

अगर आप भी मां काली मंदिर, बखोरापुर के दर्शन करना चाहते हैं तो आपको आरा रेलवे जंक्शन से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर की तरफ बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर गांव आना होगा। यहां पर आप मां काली के दिव्य स्वरुप के दर्शन कर सकते हैं। 

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