Bihar election 2025: क्या Nitish की स्कीमों ने बदल दी बिहार की राजनीति? चौंकाने वाले रिज़ल्ट ने बढ़ाई हलचल!

Bihar election 2025: बिहार चुनाव 2025 के परिणाम और रुझान कई लोगों के लिए चौंकाने वाले साबित हो रहे हैं। पिछली बार 50 सीटों के आसपास सिमट चुकी जेडीयू

Nov 14, 2025 - 17:58
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Bihar election 2025: क्या Nitish की स्कीमों ने बदल दी बिहार की राजनीति? चौंकाने वाले रिज़ल्ट ने बढ़ाई हलचल!

Bihar election 2025: बिहार चुनाव 2025 के परिणाम और रुझान कई लोगों के लिए चौंकाने वाले साबित हो रहे हैं। पिछली बार 50 सीटों के आसपास सिमट चुकी जेडीयू इस बार 80 सीटों से आगे निकलकर मजबूत बढ़त बनाए हुए है। यह वापसी राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर रही है। सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने जेडीयू को फिर से जनता का भरोसा दिला दिया? इसका जवाब नीतीश कुमार के 20 साल के शासनकाल में बिछाई गई योजनाओं की रूपरेखा में छिपा है। इस चुनाव में नीतीश कुमार “स्कीम मैन” के रूप में उभरकर सामने आए हैं। उनकी योजनाओं का सबसे ज्यादा प्रभाव महिलाओं पर पड़ा, जिनकी एकजुटता ने इस चुनाव में जेडीयू को नई जान दी।

जेडीयू की इस जीत का सबसे बड़ा श्रेय बिहार की महिलाओं को जाता है। नीतीश कुमार ने शुरू से ही महिलाओं को अपनी राजनीति के केंद्र में रखा। 2006 में शुरू हुई साइकिल और यूनिफॉर्म योजना ने लड़कियों के स्कूल जाने की संख्या में भारी बढ़ोतरी की और यह योजना सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गई। इसके बाद 50% महिला आरक्षण के साथ पंचायतों और नगर निकायों में उनकी भागीदारी बढ़ाई गई। लेकिन सबसे बड़ा चुनावी मास्टरस्ट्रोक रहा 10 हज़ार रुपये वाली योजना। चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार प्रोत्साहन योजना के माध्यम से 1.3 करोड़ जीविका दीदियों के खातों में ₹10,000 सीधे भेजे गए। इन महिलाओं में से बड़ी संख्या पहली बार आर्थिक रूप से सशक्त महसूस कर रही थी। यही नहीं, 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता का आश्वासन भी दिया गया। महिलाओं की यह व्यापक लामबंदी सीधे जेडीयू के वोट बैंक में बदलती दिखी।

4 अप्रैल 2016 को लागू की गई सम्पूर्ण शराबबंदी आज भी नीतीश कुमार के लिए एक मजबूत आधार है। भले ही इस फैसले पर कई स्तरों पर सवाल उठे, लेकिन ग्रामीण महिलाओं में नीतीश की छवि एक बड़े सामाजिक सुधारक के रूप में स्थापित हो गई। अनेक महिलाओं ने माना कि इस फैसले से उनके परिवार टूटने से बचे। इसके अलावा, युवाओं को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार ने 2016 में दो प्रमुख योजनाएँ शुरू कीं—मुख्यमंत्री स्वयं सहायता भत्ता और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना। स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को ₹1,000 महीना दिया गया, जबकि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना ने लाखों छात्रों को 12वीं के बाद की पढ़ाई के लिए ₹4 लाख तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया। इन योजनाओं ने युवाओं और उनके परिवारों को सरकार से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ दिया।

पेंशन वृद्धि, मुफ्त बिजली और ‘सात निश्चय’ का फायदा जेडीयू को मिला

महिलाओं और युवाओं के अलावा नीतीश कुमार ने आम नागरिकों को भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सीधे प्रभावित किया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर ₹400 से ₹1,100 करना एक बड़ा कदम था, जिसका लाभ राज्य के एक करोड़ से ज्यादा बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों को हुआ। इसके साथ ही अगस्त 2025 से 125 यूनिट बिजली मुफ्त करने की घोषणा ने लगभग हर परिवार को राहत दी। ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के अंतर्गत हर घर नल का जल, सड़क निर्माण, शहरी सुविधाओं का विस्तार और रोजगार सृजन जैसे कार्यों ने भी जनता में विश्वास बढ़ाया। चाहे इसे कल्याणकारी राजनीति कहा जाए या एक सुनियोजित चुनावी रणनीति, नीतीश कुमार की योजनाओं ने उनकी राजनीतिक पहचान को और मजबूत किया है और यही कारण है कि 2025 के चुनाव में जेडीयू की दमदार वापसी संभव हुई।

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