मोदी सरकार की नीतियों से बिहार के 700 परिवारों का चूल्हा बंद होने के कगार पर...

बिहार के दर्जन भर इथेनॉल प्लांट बंद होने की कगार पर हैं या बंद हो चुके हैं। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की रोजी रोटी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कई लोग तो दूसरे राज्यों में काम करते थें, वो खुशी खुशी बिहार लौट कर आ गए थें। अब उनके सामने फिर से दूसरे राज्यों में प्रवासी मजदूर बनने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

Feb 7, 2026 - 09:28
Feb 13, 2026 - 18:57
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मोदी सरकार की नीतियों से बिहार के 700 परिवारों का चूल्हा बंद होने के कगार पर...
Freepik से साभार

बिहार के बक्सर जिले में स्थित एक इथेनॉल प्लांट के मालिक ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी व्यथा सार्वजनिक की। सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें मजबूरन यह प्लांट बंद करना होगा। अगर यह प्लांट बंद हुआ तो कम से कम 700 लोग बेरोजगार हो जाएंगे। 700 लोगों के बेरोजगार होने का मतलब है 700 परिवारों का चूल्हा बंद हो जाना। 


यह कहानी तो सिर्फ एक इथेनॉल प्लांट की है लेकिन आज की तारीख में बिहार के दर्जन भर प्लांट बंद होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। बिहार को इथेनॉल हब बनाने को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़े बड़े दावे किए थें लेकिन अब बिहार में इथेनॉल फैक्ट्रियां बर्बाद होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। 


इथेनॉल प्लांट बर्बाद होने की वजह
भारत की तेल विपणन कंपनियों ने बिहार की इथेनॉल कंपनियों से इथेनॉल की खरीद को 50 फीसदी तक सीमित कर दिया है। खरीद सीमा आधी किए जाने से इथेनॉल फैक्ट्रियों की स्थिति चरमरा चुकी है। इथेनॉल की खरीद तेल विपणन कंपनियां ही करती हैं। इन्हें खुले बाजार में बेचने का कोई विकल्प नहीं है। जब क्षमता ही आधी हो जाएगी तो कंपनियां अपना खर्च कैसे पूरा करेंगी। कर्मचारियों को वेतन कहां से दे पाएंगी ! 


अचानक से पैदा हुई ऐसी स्थिति से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार इथेनॉल कंपनियों को किसी भी प्रकार की मदद की पेशकश भी भी नहीं कर रही हैं। इथेनॉल प्लांट मालिकों के समक्ष कंपनी बंद करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आ रहा है। 


केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 01 नवंबर 2025 से नियमों में परिवर्तन करते हुए बिहार की इथेनॉल खरीद को 100 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया। यह नियम बिहार के साथ ही महाराष्ट्र की भी कुछ इथेनॉल कंपनियों पर लागू हुआ। वर्तमान समय में बिहार में प्रतिवर्श 84 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन होता है। इस साल महज 44 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीद का ऑर्डर मिला है। आपूर्ति आधी होने से अब इथेनॉल प्लांट का संचालन आर्थिक रुप से नुकसानदेह हो चुका है। 


वहीं इसकी एक और वजह यह भी सामने आई है कि बिहार के अलावा दूसरे राज्यों में भी इथेनॉल के नए प्लांट लग रहे हैं, जिसकी वजह से बिहार के कोटे को आधा कर दिया गया है, वहीं मक्के से बन रहे इथेनॉल का उत्पादन महंगा पड़ता है जबकि गन्ने से इथेनॉल का उत्पादन अपेक्षाकृत सस्ता होता है। महाराष्ट्र और गुजरात में गन्ने से इथेनॉल बनता है जबकि बिहार में मक्के से। 


अब आज की स्थिति यह है कि बिहार के दर्जन भर इथेनॉल प्लांट बंद होने की कगार पर हैं या बंद हो चुके हैं। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की रोजी रोटी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कई लोग तो दूसरे राज्यों में काम करते थें, वो खुशी खुशी बिहार लौट कर आ गए थें। अब उनके सामने फिर से दूसरे राज्यों में प्रवासी मजदूर बनने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। 

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SIMRANJEET SINGH Diploma in media studies ( Ranchi ),8 years experience in news media, Political Expert Chief editor in Bihar News