बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में अब एडमिशन, अटेंडेंस से लेकर रिजल्ट तक सब ऑनलाइन, गर्वनर सैयद अता हसनैन का ऐतिहासिक फैसला
बिहार गर्वनर ने जो सबसे बड़ा फैसला लिया है, उसमें बिहार के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समर्थ पोर्टल को मिशन मोड में लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। समर्थ पोर्टल पर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले यूनिवसिर्टीज को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।
Governor Syed Ata Hasnain decision
बिहार के विश्वविद्यालयों की बदहाल स्थिति में बदलाव लाने के लिए लोकभवन ने पूरी तैयारी कर ली है। बिहार के गर्वनर सह कुलाधिपति ले जनरल सैयद अता हसनैन ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन फैसलों से बिहार में उच्च शिक्षा क स्थिति में बड़े पैमान पर सुधार देखने को मिल सकता है। बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक डिजिटल बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।
बिहार गर्वनर ने जो सबसे बड़ा फैसला लिया है, उसमें बिहार के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समर्थ पोर्टल को मिशन मोड में लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। समर्थ पोर्टल पर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले यूनिवसिर्टीज को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।
कुलाधिपति कार्यालय की ओर से दिए गए गाइडलाइन के अनुसार अब यूनिवसिर्टीज के सभी प्रकार के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य सिर्फ समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे। इनमें एडमिशन से लेकर एग्जामिनेशन फॉर्म भरने, एडमिट कार्ड जारी करने और रिजल्ट प्रकाशन तक के तमाम कार्य शामिल हैं। इसके अलावा शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की हाजिरी की निगरानी, उनकी छुट्टियों का प्रबंधन, सेवा से जुड़े मामले और वेतन का भुगतान सब इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म यानी समर्थ पोर्टल के जरिए ही किए जाएंगे।
वहीं यूनिवर्सिटीज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और कार्यशैली में सतर्कता और निगरानी के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब बिहार के सभी यूनिवर्सिटीज में मुख्य सतर्कता अधिकारी यानी चीफ विजिलेंस ऑफिसर नॉमिनेट किए जाएंगे। ये ऑफिसर यूनिवर्सिटीज में होने वाले वित्तीय लेनदेन पर कड़ी निगरानी रखेंगे। ये अधिकारी यूनिवर्सिटी में सार्वजनिक धन के उपयोग के लिए पूर्ण रुप से जवाबदेह होंगे। समय समय पर उन्हें सरकार से मिलने वाले अनुदान के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र देना होगा।
अब राज्य में मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत ग्रेजुएशन करने वाली छात्राओं को मिलने वाली पचास पचास हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के भुगतान में भी अब विलंब नहीं होगा। इस प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए वर्ष 2025 तक ग्रेजुएशन करने वाली सभी छात्राओं का पूरा डेटा समर्थ पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। इसके बाद अब छात्राओं को बिना किसी के हस्तक्षेप और मदद के सीधे उनके बैंक खाते में पैसा भेज दिया जाएगा।
गर्वनर के इस फैसले से साफ हो गया है कि बिहार के इतिहास में पहली बार विश्वविद्यालयों की पूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास हो रहा है। इससे पारदर्शिता और प्रबंधन दोनों बेहतर हो सकेगा। बिहार गर्वनर के इस ऐतिहासिक डिजिटल सुधार से राज्य भर के लाखों छात्र छात्राओं को सीधा लाभ मिल सकेगा। बिहार की शिक्षा व्यवस्था में यह बदलाव अगर सही तरीके से लागू हुआ तो आने वाले दिनों में बिहार के यूनिवसिर्टीज की तस्वीर बदल कर रख देगा।
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