अब मैं एमएलसी हूं, अब याचिका रद्द की जाए !
सुप्रीम कोर्ट में पिछली बार इस मामले में राज्य सरकार और दीपक प्रकाश दोनों से ही जवाब मांगा था। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई होनी थी। भाजपा नेता राजेश कुमार सिंह ने दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के द्वार पर दस्तक दी थी।
बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि अब वो एमएलसी बन गए हैं। उनके मामले में संविधान का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। अब इस याचिका को खारिज कर दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में पिछली बार इस मामले में राज्य सरकार और दीपक प्रकाश दोनों से ही जवाब मांगा था। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई होनी थी। भाजपा नेता राजेश कुमार सिंह ने दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के द्वार पर दस्तक दी थी।
सुनवाई से ठीक एक दिन पहले मंत्री दीपक प्रकाश ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है लेकिन बिहार सरकार की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं हुआ है। संविधान के अनुसार अगर कोई व्यक्ति विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है और उसे मंत्री बनाया जाता है तो अधिकतम वो छह महीने तक मंत्री रह सकता है। छह महीने के अंदर उसे सदन की सदस्यता लेनी होती है अन्यथा उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।
दीपक प्रकाश को पहली बार 22 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया गया था। 15 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही पूरा मंत्रिमंडल भी खत्म हो गया था। दीपक प्रकाश ने दावा किया कि उनका पहला कार्यकाल छह महीने से पहले ही समाप्त हो गया था।
इसके बाद 07 मई 2026 को सम्राट चौधरी सीएम बनें और दोबारा से दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया गया था। पूरा मामला यहीं से शुरु हुआ था। याचिकाकर्ता भाजपा नेता ने एसआर चौधरी और बनाम पंजाब 2001 के फैसले का हवाला दिया था। इस फैसले में छह महीने की संवैधानिक सीमा को दरकिनार कर मंत्री पद बनाए रखने की कोशिश को गंभीरता से लिया था।
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