Jharkhand News: जब पूरे देश में गूंजेगा युद्ध का सायरन! झारखंड के इन छह शहरों में युद्ध जैसी तैयारी
Jharkhand News: देश में भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 5 मई को सरकार ने सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में मॉक ड्रिल करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 7 मई को 244 जिलों के 259 स्थानों पर युद्ध जैसे हालात के लिए सायरन बजाया जाएगा।
Jharkhand News: देश में भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 5 मई को सरकार ने सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में मॉक ड्रिल करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 7 मई को 244 जिलों के 259 स्थानों पर युद्ध जैसे हालात के लिए सायरन बजाया जाएगा। इसका मकसद आम नागरिकों को युद्ध के समय बजने वाले सायरनों को पहचानना सिखाना है। इस दौरान सायरन की आवाज कुछ समय तक गूंजेगी जिससे लोग सतर्क हो सकें। हालांकि प्रशासन की ओर से साफ कर दिया गया है कि इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
गंभीर हालातों में सायरन का महत्व
सामान्य रूप से ऐसे सायरन युद्ध या आपातकाल जैसी स्थितियों में बजाए जाते हैं। इसका उद्देश्य लोगों को हवाई हमलों के प्रति सतर्क करना होता है। इसके अलावा इससे वायुसेना के साथ रेडियो संपर्क की शुरुआत भी की जाती है और सिविल डिफेंस की तैयारियों की जांच होती है। इसी के साथ ब्लैकआउट की व्यवस्था और कंट्रोल रूम की प्रतिक्रिया का परीक्षण भी किया जाता है। मॉक ड्रिल के जरिए ये देखा जाता है कि यदि कोई बड़ा हमला हो जाए तो नागरिकों और प्रशासन की प्रतिक्रिया कैसी होगी।
झारखंड के छह शहरों का चयन
इस बार की मॉक ड्रिल में झारखंड के छह शहरों को भी शामिल किया गया है। इनमें से चार शहर जैसे रांची जमशेदपुर बोकारो और गोमो को कैटेगरी 2 में रखा गया है। जबकि गोड्डा और साहेबगंज को कैटेगरी 3 में डाला गया है। झारखंड से कोई भी शहर कैटेगरी 1 में शामिल नहीं किया गया है। हर कैटेगरी के हिसाब से सायरन बजाने की तैयारी और उसकी तीव्रता अलग होगी ताकि हर स्थिति का रियल टाइम विश्लेषण किया जा सके। यह पहली बार है जब झारखंड के इतने शहरों में एकसाथ ऐसा अभ्यास होने जा रहा है।
कैसा होगा यह सायरन और कहां तक सुनाई देगा
इस मॉक ड्रिल के दौरान जो सायरन बजेगा वह आम अलार्म या एंबुलेंस के सायरन जैसा नहीं होगा। यह एक विशेष किस्म का युद्धकालीन चेतावनी सायरन होगा जिसकी आवाज 120 से 140 डेसिबल के बीच होगी। यह सायरन लगभग 2 से 5 किलोमीटर दूर तक साफ-साफ सुना जा सकेगा। इसका मुख्य उद्देश्य यही रहेगा कि लोग इस विशेष ध्वनि को पहचान सकें और तत्काल अपनी सुरक्षा की दिशा में कदम उठा सकें। ड्रिल के दौरान यह भी परखा जाएगा कि लोग सही समय पर अपनी जगह रोकते हैं या नहीं और बिजली व अन्य संसाधनों का प्रयोग कैसे रोकते हैं।
केंद्र सरकार की व्यापक योजना
इस राष्ट्रीय स्तर की मॉक ड्रिल को लेकर केंद्र सरकार ने पहले से ही व्यापक योजना बनाई है। इसमें राज्यों और जिलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि किस समय सायरन बजेगा और कैसे लोगों को जागरूक किया जाएगा। केंद्र की योजना है कि देश के नागरिकों को इस तरह की परिस्थितियों के लिए मानसिक और व्यावहारिक तौर पर तैयार किया जाए। यह मॉक ड्रिल एक अभ्यास है लेकिन इसके पीछे का संदेश बहुत स्पष्ट है कि देश को किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहना है।
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