सरकारी स्कूलों को बिहार सरकार का तोहफा, मॉडर्न एजुकेशन के लिए विशेष पहल !
बिहार कैबिनेट ने राज्य के 789 सरकारी स्कूलों में मॉडर्न तरीके से विकसित करने की योजना पर मुहर लगाई है। इन चयनित स्कूलों में स्मार्ट क्लास, लैबोरेट्री और लाइब्रेरी आदि बनाए जाएंगे।
हमारा बिहार बदल रहा है। हमारे बिहार की शिक्षा व्यवस्था भी बदल रही है। बिहार के सरकारी स्कूल भी अब प्राइवेट स्कूलों से मुकाबला करेंगे क्योंकि अब सरकारी विद्यालयों के छात्रों को मॉडर्न एजुकेशन से जोड़ा जा रहा है।
दरअसल बिहार सरकार की ओर से राज्य के 789 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में मॉडर्न टीचिंग की शुरुआत की जा रही है। इन स्कूलों में वर्ग 6 से बारहवीं तक के छात्रों के लिए स्मार्ट क्लास, लैबोरेट्री और लाइब्रेरी के जरिए टेक्निकली साक्षर बनाए जाने की योजना बनाई गई है।
बिहार कैबिनेट ने इस योजना के लिए 1485.85 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इस राशि से 2025-26 के लिए चयनित 789 सरकारी विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार छात्रों को शिक्षा दी जाएगी। इसमें छात्रों के अंदर इनोवेशन, स्किल डेवलपमेंट, टेक्निकल एजुकेशन और मॉडर्न टीचिंग सिस्टम को प्रमोट किया जाएगा।
बीते कई सालों में बिहार सरकार निरंतर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकारी स्कूलों की जर्जर व्यवस्था को अपेक्षाकृत काफी सही कर दिया गया है। बिहार के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक वातावरण बना है, हालांकि यह पर्याप्त नहीं है। अभी राज्य सरकार को और भी ज्यादा प्रयास करने होंगे।
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि प्राइवेट स्कूल आज भी बहुसंख्य अभिभावकों की पहुंच से बाहर हैं। जब तक बिहार के सरकारी स्कूलों की स्थिति में बदलाव नहीं होगा, तब तक बिहार पूर्ण रूप से विकसित प्रदेश की श्रेणी में नहीं खड़ा होगा।
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