RJD ने जरुरत से ज्यादा दिया, ऋतु जायसवाल की डायरेक्ट एंट्री थी राबड़ी आवास में....
आज हम बात करेंगे ऋतु जायसवाल की जो अब भाजपाई हो चुकी है। आरजेडी में उनकी क्या हैसियत और क्या ताकत थी। उस पर विस्तार से आपको बताएंगे।
आज की राजनीति जरुरत से ज्यादा गंदी हो चुकी है। दल बदल पहले भी होता था लेकिन दल बदलने वालों को लोग दलबदलू कहते थें। समाज में उसे अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था। तब राजनीति विचारधारा की होती थी। आज की राजनीति सिर्फ सत्ता, सुख सुविधा और धन दौलत के लिए होती है, तभी तो पांच मिनट नहीं लगता लोगों को दल बदलने में...
आज हम बात करेंगे ऋतु जायसवाल की जो अब भाजपाई हो चुकी है। आरजेडी में उनकी क्या हैसियत और क्या ताकत थी। उस पर विस्तार से आपको बताएंगे। ऋतु जायसवाल कभी आरजेडी में सामान्य कार्यकर्ता बनकर नहीं रहीें। वो एक मुखिया थीं। सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल कर काफी चर्चा में आईं। शुरुआती दिनों में वो नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से जुड़ी हुईं थीं। जेडीयू में काफी प्रयासों के बाद भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हो सका।
इसके बाद उन्होंने आरजेडी में एंट्री ली। धीरे धीरे वो तेजस्वी यादव के इतने करीब हो गईं कि भाई बहन जैसा रिश्ता बन गया। राजनीतिक रिश्ता पारिवारिक रिश्ते में बदल गया। सोशल मीडिया पर वो तस्वीर भी तेजी से वायरल हो रही है जिसमें वो तेजस्वी यादव को राखी बांधते हुए दिखाई दे रहीं हैं।
साल 2020 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने ऋतु जायसवाल को परिहार विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा लेकिन वो जीत नहीं पाई। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने ऋतु जायसवाल को शिवहर लोकसभा सीट से टिकट दिया। ऋतु यहां भी हार गईं। असली लड़ाई 2025 विधानसभा चुनाव से शुरु हुई। ऋतु जायसवाल एक बार फिर से परिहार से लड़ना चाहती थीं लेकिन पार्टी उन्हें बेलसंड से लड़ाना चाहती थीं। वो नहीं मानीं और निर्दलीय ही परिहार से चुनावी मैदान में उतर गईं।
परिहार के चुनावी नतीजों की बात करें तो भाजपा की गायत्री देवी 82644 वोट लाकर जीत गईं। निर्दलीय ऋतु जायसवाल 65,455 वोट लाकर दूसरे नंबर पर रहीं जबकि आरजेडी की उम्मीदवार स्मिता गुप्ता 48,534 वोट लोकर तीसरे नंबर पर रहीं। जनसुराज के अवधेश प्रसाद कुशवाहा को महज 3217 वोट मिल सकें। ऐसे में सिर्फ 17 हजार वोटों के अंतर से भाजपा जीत गई। ऋतु जायसवाल भले ही आरजेडी से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहीं थीें पर आरजेडी के वोटर और समर्थक उनके साथ ही थें। ऋतु जायसवाल के इस कदम को पार्टी ने बगावत माना और 06 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया।
लेकिन बात सिर्फ चुनावी नहीं है, पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंध भी बहुत मायने रखते हैं। कहते हैं कि राबड़ी आवास में ऋतु जायसवाल की डायरेक्ट एंट्री होती थी। कोई बताए कि बिहार में ऐसे कितने आरजेडी के नेता हैं जो डायरेक्ट लालू राबड़ी आवास में जा सकते हैं ! आरजेडी के विधायकों, सांसदों, पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों को वहां जाने में कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं, ये वही लोग बता सकते हैं।
आरजेडी में न जाने कितनी महिला नेता और कार्यकर्ता हैं, कितने लोगों को यह सौभाग्य हासिल है कि वो तेजस्वी यादव को राखी बांध सकें! आरजेडी में एंट्री लेते ही ऋतु जायसवाल आरजेडी की आधिकारिक प्रवक्ता बन गईं। कम समय में ही विधानसभा का टिकट ले लिया। विधानसभा हारने के बावजूद लोकसभा का टिकट भी मिल गया। आरजेडी महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष भी बन गईं। इसके बाद भी ऋतु जायसवाल ने हरा गमछा छोड़कर भगवा गमछा पहनना स्वीकार कर लिया।
यह सबक है आरजेडी समेत सभी राजनीतिक दलों के लिए। आरजेडी के हजारों कार्यकर्ता चुनाव लड़ना चाहते हैं लेकिन कितने लोगों को टिकट मिल पाता है। हालांकि सबको टिकट देना संभव भी नहीं है लेकिन एक उम्मीद तो होती ही है और जीवन भर उसी उम्मीद को लेकर कार्यकर्ता पार्टी का झंडा ढोता रहता है। जिसको बिना मेहनत टिकट मिल जाता है, वो उसका महत्व नहीं रख पाता।
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