राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने संसद में उठाया कुम्हार, लोहार, बढ़ई समाज का मुद्दा, राष्ट्रीय बोर्ड गठित करने की मांग
संसद में अपने संबोधन के दौरान सांसद डॉ भीम सिंह ने कुम्हार, बढ़ई एवं लोहार समाज की वर्तमान स्थिति से सदन को अवगत कराया और उनके समग्र विकास एवं उनकी कला कौशल के संरक्षण हेतु निर्णायक कदम उठाने की मांग सरकार से की। डॉ भीम सिंह ने सरकार के राष्ट्रीय शिल्पकला बोर्ड के गठन की मांग की।
बिहार से राज्यसभा सदस्य डॉ भीम सिंह ने राज्यसभा में पारंपरिक कारीगर समुदायों के सशक्तिकरण का मामला उठाया। उन्होंने इनके समग्र सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए राष्ट्रीय बोर्ड गठित करने की मांग की। सांसद ने यह मांग प्रखर तरीके से सदन के समक्ष उठाई।
गुरुवार को भाजपा सांसद डॉ भीम सिंह ने भारत के परंपरागत कारीगर समुदाय बढ़ई, लोहार और कुम्हार समाज की प्रगति के लिए राष्ट्रीय शिल्पकला बोर्ड के गठन की मांग की। बता दें कि यह समुदाय जो अपनी कुशल शिल्पकला के लिए आदिकाल से जाना जाता रहा है, वो बेहद दयनीय अवस्था में जी रहा है। उनका सशिक्तरण इस दौर में बेहद अनिवार्य है। डॉ भीम सिंह द्वारा संसद में उनकी आवाज उठाना बेहद सराहनीय माना जा रहा है।
संसद में अपने संबोधन के दौरान सांसद डॉ भीम सिंह ने कुम्हार, बढ़ई एवं लोहार समाज की वर्तमान स्थिति से सदन को अवगत कराया और उनके समग्र विकास एवं उनकी कला कौशल के संरक्षण हेतु निर्णायक कदम उठाने की मांग सरकार से की। डॉ भीम सिंह ने सरकार के राष्ट्रीय शिल्पकला बोर्ड के गठन की मांग की।
भाजपा सांसद का तर्क है कि राष्ट्रीय शिल्पकला बोर्ड के गठन से इन समुदायों की समृद्ध शिल्पकला, उनकी परंपरा और उनकी विरासत का संरक्षण हो सकेगा। इससे उनकी आर्थिक प्रगति तो होगी ही, सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होगी।
राज्यसभा में सांसद ने लोहार, बढ़ई एवं कुम्हार समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस समाज की नई पीढ़ी अपने पेशे से दूर हो रही है, ऐसे में उनका संरक्षण सरकारी स्तर पर बेहद जरुरी है। इसके लिए राष्ट्रीय शिल्पकला बोर्ड का गठन बेहद आवश्यक है। उन्हांने कहा कि भारत में इस समुदाय की आबादी 05 से 06 प्रतिशत है। ये भारतीय संस्कृति एवं अर्थव्यवस्था के अभिन्न अंग हैं। इन समुदायों ने अपनी कला, कौशल और मेहनत से समाज को समृद्ध बनाया है।
इसके साथ ही उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बदलते समय और लगातार आधुनिक होती तकनीक के प्रभाव ने इन समुदायों और इनके पारंपरिक व्यवसायों के समक्ष नई चुनौतियां खड़ी होती जा रही हैं। इनके आजीविका के अवसर लगातार सिमटते जा रहे हैं।
राज्यसभा डॉ भीम सिंह ने सुझाव दिया है कि सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ प्रभावी तरीके से इन समुदायों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और विपणन व्यवस्था दिया जाना चाहिए। सांसद ने ट्रेनिंग सेंटर, आसान लोन सिस्टम और स्पेशल आर्थिक मदद की बात भी अपने संबोधन में कही
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