बिहार में सवर्ण यादव एकता की आहट, राजपूत नेता बनेंगे आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष !
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की वजह से बिहार के तमाम राजनीतिक समीकरण इधर से उधर हो चुके हैं। बिहार के सामान्य वर्ग में अब भाजपा जेडीयू वाले पुराने रास्ते से अलग रास्ते पर चलने की बेचैनी साफ तौर पर देखी जा रही है। लव कुश समीकरण से सवर्णों का मन भर चुका है। ऐसे में राजद सुधाकर सिंह को आगे कर एक नए समीकरण को जन्म दे सकता है।
बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नए समीकरण की शुरुआत हो चुकी है। सोशल मीडिया पर सवर्ण यादव एकता की हवा पिछले एक महीने से बह रही है। इसी बीच अब राजद के प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की दस्तक भी देखने को मिल सकती है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि सुधाकर सिंह आरजेडी के नए प्रदेश अध्यक्ष बन सकते हैं। उम्र की अधिकता और राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए मंगनी लाल मंडल की छुट्टी हो सकती है। सुधाकर सिंह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के पुत्र हैं और वर्तमान में बक्सर लोकसभा सीट से सांसद हैं।
मंगनी लाल मंडल कभी आरजेडी कार्यालय से बाहर दिखाई नहीं पड़ते हैं। उम्र ज्यादा होने की वजह से वो ज्यादा सफर नहीं कर सकते हैं लेकिन सुधाकर सिंह युवा हैं। वो पूरे बिहार का दौरा करने में सक्षम हैं। सुधाकर सिंह को संगठन चलाने का भी अनुभव है।
दरअसल नीतीश कुमार के पद छोड़ने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की वजह से बिहार के तमाम राजनीतिक समीकरण इधर से उधर हो चुके हैं। बिहार के सामान्य वर्ग में अब भाजपा जेडीयू वाले पुराने रास्ते से अलग रास्ते पर चलने की बेचैनी साफ तौर पर देखी जा रही है। लव कुश समीकरण से सवर्णों का मन भर चुका है। ऐसे में राजद सुधाकर सिंह को आगे कर एक नए समीकरण को जन्म दे सकता है।
बिहार में राजपूत समाज एक प्रभावशाली समाज माना जाता है। राजपूत समाज प्रारंभ से ही समाजवादी विचारधारा के करीब रहा है। कई राजनीतिक वजहों से राजपूत समाज अपना 90 प्रतिशत वोट और समर्थन भाजपा, जदयू को करता आया है लेकिन कभी डिप्टी सीएम भी उनके समाज से नहीं बनाया गया। जातियों के खांचे में बंटे बिहार के राजपूतों के बीच इस बात की नाराजगी है।
जब जब भाजपा और जदयू ने एक होकर सरकार बनाई तो पहले लंबे समय तक सुशील कुमार मोदी बिहार के डिप्टी सीएम बनें। उसके बाद तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी डिप्टी सीएम बनीं। सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी डिप्टी सीएम बनें लेकिन एक भी राजपूत आज तक डिप्टी सीएम नहीं बन पाया। ऐसे में नाराजगी होना स्वाभाविक भी है।
उधर बात अगर सुधाकर सिंह की कर लें तो सुधाकर सिंह खांटी समाजवादी और किसान परस्त नेता माने जाते हैं। सुधाकर सिंह एक बार नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनंें तो नीतियों को लेकर टकराव शुरु हुआ। सुधाकर सिंह ने इस्तीफा दे दिया। सुधाकर सिंह की पहचान एक जुझारु नेता की है। सुधाकर सिंह एक विद्वान व्यक्ति भी हैं। पढ़ते लिखते खूब हैं। बोलते हैं तो तथ्यों, तर्कों और आंकड़ों के साथ। सुधाकर सिंह के आंकड़ों और तर्कों को विरोधी ढंग से काउंटर भी नहीं कर पाते हैं। ऐसे में अगर खबरों पर मुहर लगती है और सुधाकर सिंह आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो बिहार की सुस्त पड़ी राजनीति में एक बार फिर से हलचल देखने को मिल सकती है।
यदुवंशी रघुवंशी भाई भाई का नारा बिहार की फिजाओं में गूंज रहा है। हालांकि इसको लेकर जमीन पर कोई बड़ी पहल दिखाई तो नहीं दे रही, लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है। यादव समाज और राजपूत समाज के जागरुक नौजवान इसे लेकर आपसी चर्चा की शुरुआत कर चुके हैं। ऐसें में आरजेडी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव सुधाकर सिंह को बिहार आरजेडी की कमान सौंपकर नया राजनीतिक वातावरण तैयार कर सकते हैं।
बिहार में मुख्यमंत्री बदल चुके हैं। इस बदले हुए राजनीतिक माहौल में आरजेडी को भी अपनी संरचना में बदलाव करना होगा क्योंकि आरजेडी मुख्य विपक्षी पार्टी है। आरजेडी के लिए चुनौतियां भी हैं और संभावनाएं भी। इसके लिए नया समीकरण और नया संगठन तैयार करना समय की मांग है।
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