यह यूपी - बिहार नहीं है, यहां बुलडोजर संस्कृति नहीं चलेगी, हाई कोर्ट ने क्यों कहा ?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐसा कहते हुए नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई। मामला पूर्व कॉरपोरेटर मतीन पटेल और हनीफ खान की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई का था।
यूपी से शुरू हुआ बुलडोजर राज अब बिहार तक पहुंच चुका है। आए दिन अतिक्रमण हटाने के नाम पर प्रशासन किसी की भी संपत्ति को बुलडोजर से ध्वस्त कर देता है। महाराष्ट्र में ऐसे ही एक मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि यूपी और बिहार की तरह महाराष्ट्र में भी बुलडोजर संस्कृति लाना सही नहीं है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि किसी के लिए भी घर बनाना आसान नहीं होता। एक झटके में किसी के घर को बुलडोजर से ध्वस्त कर देना सही नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे पूरी तरह से मनमाना और सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस का पूरी तरह से उल्लंघन बताया।
जस्टिस सिद्धेश्वर थोम्ब्रे के नेतृत्व वाले खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि लोग जीवन भर की जमा पूंजी बंटोर कर एक आशियाना बनाते हैं। यह कोई आसान काम नहीं होता। हर कोई आपके और मेरी तरह सक्षम नहीं होता कि आसानी से अपना घर बना सकें।
कोर्ट ने यूपी और बिहार का नाम लेते हुए कहा कि यह यूपी या बिहार नहीं है। महाराष्ट्र में इस बुलडोजर संस्कृति को मत घुसने दीजिए। मामला ओवैसी की पार्टी AIMIM पार्षद मतीन पटेल और स्थानीय नागरिक हनीफ खान की प्रॉपर्टी को बुलडोजर से ध्वस्त कराने से जुड़ा था। बीते 13 मई को नगर निगम ने यह कार्रवाई की थी।
इस कार्रवाई के बाद पीड़ित पक्ष ने न्यायालय की शरण ली। सुनवाई के क्रम में कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि नगर निगम प्रशासन ने इस कार्रवाई में नियमों का पालन नहीं किया। हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई को गैर कानूनी माना।
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