उपेन्द्र कुशवाहा के साथ धोखा महंगा साबित हो सकता है एनडीए के लिए

दरअसल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के बागी विधायकों के बागी होने, टूटने और तोड़े जाने की खबरों से बिहार का कुशवाहा समाज आक्रोशित है। कुशवाहा समाज का वोट बिहार में 5 से 6% के बीच है। उपेन्द्र कुशवाहा के नाम पर यह वोट लगभग एकतरफा एनडीए को गया था।

Jan 16, 2026 - 12:50
Jan 16, 2026 - 12:50
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उपेन्द्र कुशवाहा के साथ धोखा महंगा साबित हो सकता है एनडीए के लिए

इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत में सबसे बड़ा योगदान कुशवाहा और पासवान समाज का है। 

इन दोनों समुदायों का 11 प्रतिशत वोट लगभग एकमुश्त एनडीए को गया था। पासवान समाज जहां केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को अपना नेता और लोजपा रामविलास को अपनी पार्टी मानता है तो कुशवाहा समाज उपेन्द्र कुशवाहा को अपना नेता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को अपनी पार्टी मानता है। 

उसी राष्ट्रीय लोक मोर्चा को तोड़ने की पूरी कोशिश चल रही है। दिलचस्प है कि यह कोशिश कोई विरोधी नहीं कर रहा बल्कि उपेन्द्र कुशवाहा के अपने लोग ही कर रहे हैं। 

उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के 04 में से 03 विधायक बागी हैं। सिर्फ एक उनकी पत्नी जो विधायक हैं,उनके साथ हैं। कुछ दिन पहले तक यह माना जा रहा था कि तीनों बागी विधायक भारतीय जनता पार्टी के साथ जा सकते हैं लेकिन अब जेडीयू के दूसरे नेता श्रीभगवान सिंह कुशवाहा इन बागी विधायकों को अपनी पार्टी में आने का न्यौता सार्वजनिक रूप से दे रहे हैं। 

दरअसल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के बागी विधायकों के बागी होने, टूटने और तोड़े जाने की खबरों से बिहार का कुशवाहा समाज आक्रोशित है। कुशवाहा समाज का वोट बिहार में 5 से 6% के बीच है। उपेन्द्र कुशवाहा के नाम पर यह वोट लगभग एकतरफा एनडीए को गया था। 

अगर उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी को भाजपा या जदयू द्वारा तोड़ने की कोशिश हुई तो यह एनडीए के लिए भारी पड़ सकता है। आप इसका पूरा गणित समझ लीजिए। 

पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए को 45% और इंडिया को 38% वोट हासिल हुए थें। दोनों के बीच 7 से 8% वोट का फर्क था। 

मोटे तौर पर मान लीजिए कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायकों को तोड़े जाने की अगर घटना भविष्य में हुई तो कुशवाहा समाज एनडीए से नाराज हो सकता है। 

अगर प्रतिक्रिया में आने वाले चुनावों में एनडीए के 45% में से 5% वोट खिसक कर इंडिया के साथ चले गए तो एनडीए 40% और इंडिया 42% हो जाएगा। 02 प्रतिशत वोट की बढ़त सरकार को हिला कर रख देगा। 

इसमें कोई दो राय नहीं है कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी कुशवाहा समाज के मजबूत लीडर हैं लेकिन वो जो भी हैं भारतीय जनता पार्टी के रहमो करम पर हैं। जब तक भाजपा की इच्छा होगी, वो इस पद पर रहेंगे। 

कुशवाहा समाज दिल और दिमाग से उपेन्द्र कुशवाहा को अपना नेता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को अपनी पार्टी मान चुका है। ऐसे में उपेन्द्र कुशवाहा के साथ कोई धोखा हुआ तो ये एनडीए के लिए महंगा सौदा साबित हो सकता है।

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