Bihar elections 2025: AIMIM का बिहार में धमाका! 5 सीटें कैसे जीतीं ओवैसी ने? जानें सीमांचल का मास्टरस्ट्रोक
Bihar elections 2025: इस चुनाव में AIMIM ने कुल 243 सीटों में से केवल 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन इसके बावजूद पाँच सीटें जीतना एक बड़ा
Bihar elections 2025: इस चुनाव में AIMIM ने कुल 243 सीटों में से केवल 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन इसके बावजूद पाँच सीटें जीतना एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। सीटों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन इन पाँच सीटों में पार्टी को मिला सार्वजनिक समर्थन दर्शाता है कि सीमानचल में AIMIM अब एक स्थायी और मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है। जोगीहाट, बहादुरगंज, कोचाधामन, अमौर और बायसी जैसे क्षेत्रों में पार्टी के उम्मीदवार—मुरशिद आलम, तौसिफ आलम, सरवर आलम, अख्तरुल ईमान और ग़ुलाम सरवर—ने आसानी से जीत दर्ज की। इन नेताओं की स्थानीय पकड़ और ओवैसी की लोकप्रियता ने मिलकर सीमानचल में AIMIM के लिए एक ठोस आधार तैयार किया है, जिसे अन्य पार्टियाँ अब नज़रअंदाज़ नहीं कर सकतीं।
अपनी पार्टी की शानदार जीत से उत्साहित AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जनता का धन्यवाद देने के लिए एक विशेष संदेश जारी किया। ओवैसी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर रविवार, 16 नवंबर 2025 को लिखा—“मेरे सीमानचल के भाइयों और बहनों, इंशा अल्लाह, मैं 21 और 22 नवंबर को सीमानचल में रहूंगा, ताकि मैं आप सबका शुक्रिया अदा कर सकूं।” इस संदेश से साफ झलकता है कि AIMIM सीमानचल में अपनी पकड़ को और मजबूत करने की तैयारी में है। ओवैसी की यह सक्रियता न केवल उनके समर्थकों में उत्साह बढ़ा रही है, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के लिए भी एक संकेत है कि चुनावी मैदान में AIMIM को हल्के में लेना अब संभव नहीं।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव, AIMIM बनी बड़ी शक्ति
पाँच सीटों की जीत भले ही छोटी लगे, लेकिन यह बिहार की राजनीति में बड़े परिवर्तन का संकेत है। सीमानचल क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियाँ AIMIM के लिए हमेशा अनुकूल रही हैं, और इस बार जनता के भरोसे ने इसे मजबूत बना दिया है। मुस्लिम मतदाताओं के अलावा, युवा और पिछड़े वर्गों का समर्थन भी पार्टी के साथ जुड़ता दिखा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM की यह सफलता न केवल क्षेत्रीय समीकरणों को बदलेगी, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। आने वाले चुनावों में AIMIM एक निर्णायक शक्ति बनकर उभर सकती है, खासकर उन सीटों पर जहाँ अब तक पारंपरिक पार्टियाँ एकाधिकार बनाए बैठी थीं। ओवैसी की रणनीति, स्थानीय नेतृत्व और सीमानचल के लोगों का समर्थन मिलकर आने वाले वर्षों में बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
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